लेकिन हिन्दी का सम्मान अभी अधूरा है: प्रिया वर्मा

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। भारत की मुख्य भाषा हिंदी है। बिना हिंदी के हम अपनी दिनचर्या पूरी नहीं कर सकते लेकिन आज भी हमारे देश में अंग्रेजी भाषा का आधिपत्य है। हमारी राज भाषा हिंदी को जो सम्मान मिलना चाहिए, वो आज तक नहीं मिला है। जबकि बिना हिंदी के हम विकास की कल्पना नहीं कर सकते।
यह कहना है इस शहर की शिक्षिका प्रिया वर्मा का। उन्होंने कहा है कि हिंदी भाषा का इतना अधिक महत्व है कि बिना हिंदी को इन्टरनेट से जोड़े लोगों को इन्टरनेट से नहीं जोड़ सकते हैं। जब कोई भी काम अपनी भाषा में हो तो यह लोगों को जल्दी समझ में आती है। इसी कारण अब इन्टरनेट ने भी हिंदी को अपनी अधिकारिक भाषा के रूप में अपना लिया है, जिससे हर भारतीय अब आसानी से इन्टरनेट से जुड़ सकता है।
प्रिया वर्मा कहती हैं, सही अर्थो में कहा जाय तो अगर हम अपने मूलभाषा हिंदी का प्रचार-प्रसार करें तो निश्चित ही विविधता वाले इस देश को हिंदी भाषा के माध्यम से एकता में पिरोया जा सकता है। इसकी जरूरत और सार्थकता के मद्देनजर ही हर वर्ष 14 सितम्बर को हम ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाते हैं। हिंदी दिवस एक ऐसा अवसर होता है, जिसके माध्यम से सभी भारतीयों को एकता के सूत्र में बाधा जा सकता है l
हिन्दी ही जीवन का आधार है। बिना हिन्दी के मनुष्य का जीवन अर्थहीन व दिशाहीन हो जाता है। इसके विशेष महत्व को हमें समझना होगा। हिन्दी के ज्ञान के बिना हर ज्ञान अधूरा है। हमें हिन्दी को अपने तन-मन में रचा-बसा लेना चाहिए। मनुष्य की सफलता, प्रसन्नता तथा समृद्धि उसकी तीनों वास्तविकताएं भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक गुणों के संतुलित ज्ञान एवं उनके विकास पर निर्भर होती हैं। और यह हिन्दी के बिना असंभव है। इसलिए जब तक हम हिन्दी को अपने जीवन में पूरे मन से नहीं अपनाएंगे, इसका सम्मान अधूरा रहेगा।

(लेखिका गाजियाबाद में शिक्षिका हैं।)

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