राजनीतिक दल सेठ, मठ और तलवार के साथ-साथ कलम को भी दें प्रश्रय

दीपक श्रीवास्तव/राष्ट्रीय जनमोर्चा
प्रयागराज। देश की साहित्यनगरी से कायस्थों की आवाज उठी है- ‘राजनीतिक दल सेठ, मठ और तलवार के साथ-साथ कलम को भी प्रदान करें प्रश्रय।’ अवसर था जय चित्रांस आन्दोलन के तत्वावधान में कायस्थों के उत्थान एवं राजनीतिक भागीदारी विषय पर मंथन के लिए नगर के शंकर मेमोरियल सभागार फायर ब्रिगेड चौराहे के पास जुटे कायस्थ पुरोधाओं की एक बैठक का। जहां एक मत से कायस्थों ने कहा कि सेठ (बनिया), मठ (ब्राह्मण) और तलवार (क्षत्रिय) के साथ-साथ अब राजनीतिक दलों को कलम (कायस्थ) को भी प्रश्रय प्रदान करना होगा।
रविवार, 12 सितम्बर को प्रवीण श्रीवास्तव “धुन्नू भईया” ने कहा कि अब समय आ गया है कि कायस्थ संगठित होकर राजनीतिक दलों को अपनी शक्ति से परिचित करा दें, जिससे वह कायस्थ प्रत्याशियों को टिकट देने को बाध्य हो जाएं। जबकि सु:प्रसिद्ध कवित्री आभा मधुर ने कहा कि सेठ और मठ तथा तलवार का आपस में गठजोड़ है। सेठ का धन पर कब्जा है, जबकि मठ का मन पर। आज़ जरूरत है कि सेठ और मठ के साथ ही साथ कलम (कायस्थों) की ताकत को भी विभिन्न राजनीतिक दलों को पहचान कर उनके साथ भी बराबरी का व्यवहार करना चाहिए।
अन्य वक्ताओं में सेवा निवृत्त आईएएस आरएस वर्मा, डॉ सुशील सिन्हा, कुमार नारायण, राघवेंद्र सिंह, धीरेन्द्र श्रीवास्तव, डॉ मनीष श्रीवास्तव, शालिनी श्रीवास्तव, शोभिता श्रीवास्तव, भूपेंद्र “पियूष श्रीवास्तव”, निशीथ वर्मा, डॉ केपी श्रीवास्तव एवं अनिता श्रीवास्तव, आदि भी शामिल रहे। इस दौरान कई कायस्थ राजनीतिज्ञों पदाधिकारियों का सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रशांत ने और गोविंद ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।

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