जानलेवा है ‘हर्पीज़ सिम्प्लेक्स’ वायरस, डॉ ब्रजपाल त्यागी को भारत का पहला केस हर्ष ENT अस्पताल में मिला

हर्ष ईएनटी अस्पताल में मरीज के साथ डॉ ब्रजपाल त्यागी

राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
गाजियाबाद। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से कुछ किलोमीटर की दूरी पर राजनगर स्थित हर्ष ईएनटी अस्पताल में दाद सिंप्लेक्स वायरस के संक्रमण का पहला एक मामला दर्ज किया गया है। डॉ ब्रजपाल त्यागी ने बताया कि इस नई बीमारी का नाम ‘हर्पीज़ सिम्प्लेक्स’ है और यह बहुत खतरनाक है। जो विश्व का दूसरा और भारत का पहला केस है।
शुक्रवार 11 जून को ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से डॉक्टर त्यागी ने बताया कि 35 वर्षीय विवेक को करीब एक माह पहले करोना हुआ था। वह डायबीटीज़ से ग्रसित हैं। पिछले महीने 26 मई को विवेक हर्ष अस्पताल आए। उनमें नाक के फंगस के सारे लक्षण थे। उसके साथ-साथ तेज बुख़ार, सिर दर्द और गर्दन में खिंचाव था। विवेक की दायी नाक की दूरबीन से जाँच की गई तो उसमें फंगस इन्फ़ेक्शन के लक्षण मिले।
लेकिन पैथोलॉजी रिपोर्ट ने डॉक्टर त्यागी को चौंका दिया। विवेक को ‘हर्पीज़ सिम्प्लेक्स’ टाइप-1 का इन्फ़ेक्शन निकला। डॉ बीपी त्यागी कहते हैं, 30 साल के कैरीअर में उनके सामने यह केस है। नाक के अंदर यह इन्फ़ेक्शन उन्होंने इससे पहले किसी मरीज में नहीं देखा था। स्टडी करने पर पाया कि इस तरह का एक मामला 2019 में philedelphia usa में मिला था। यह विश्व का दूसरा और भारत का पहला केस है।
क्या है हर्पीज़ सिम्प्लेक्स:
डॉ बीपी त्यागी बताते हैं, यह एक वाइरल इन्फ़ेक्शन है, जो कम प्रतिरोधक छमता वाले मरीज़ों को पकड़ता है। यह नाक के रास्ते से दिमाग की झिल्ली पर सूजन पैदा करता है। इसको हम हर्पीज़ सिम्प्लेक्स एनकेफलिटिस बोलते हैं। यह करोना वायरस से 30 गुना ज़्यादा खतरनाक है, जिसके इन्फ़ेक्शन के बाद 100 में चार लोग ही बच पाते हैं। अगर समय से पता न लगे तो यह गर्दन तोड़ बुख़ार पैदा करता है और मरीज़ की जान भी जा सकती है।
कैसे फैलता है इन्फेक्शन:
किसी भी वायरस की तरह यह छुआ-छूत की बीमारी है। मरीज़ की नाक का पानी अगर किसी दूसरे को लगेगा और उसकी प्रतिरोधक क्षमता कम है तो उसे भी यह बीमारी पकड़ सकती है।
आखिर बचाव क्या है:
मरीज़ के सम्पर्क में आने से पहले मास्क व दस्ताने पहनें।
मरीज़ को आयसोलेशन वार्ड में रखें और वार्ड को हर रोज़ सेनिटीज करें।
तेज बुख़ार, गर्दन में जकड़न होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
डायबीटीज़ के मरीज़ अपनी शुगर संतुलित रखें।
प्रतिरोधक छमता को बढ़ाएं।
इलाज क्या है?
इंजेक्शन acyclovir जो दिन मैं चार बात 21 दिन के लिए दिया जाता है और इसके साथ-साथ नाक के रास्ते की दूरबीन विधि से सफ़ाई की जाए।
पैथोलॉजी में रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही मरीज़ की छुट्टी की जाए।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*