काशी में घर-घर मेडिकल किट बांट रही सेवा भारती

कृष्णनाथ पांडेय/राष्ट्रीय जनमोर्चा
वाराणसी। त्रासदी का दौर, डरे सहमे लोग, एक दूसरे से मिलना-जुलना भी दूभर! एक ही घर में माँ, बाप, बेटा बहूं और बच्चे सब अलग-अलग। कोई किसी के संपर्क में नहीं आना चाहता, क्योंकि किसी को कोरोना हुआ है या उसके लक्षण पाए गए हैं। घर से बाहर निकलने में भी एक अज्ञात भय कि कहीं उसे भी कोरोना न हो जाये। दुनिया एकाएक सिमट-सी गई है एक अनजाने और अपरोक्ष दुश्मन के भय से। खांसी आ रही है, दम फूल रहा है, तीव्र ज्वर से पीड़ित हैं लेकिन अपनी व्यथा किससे कहें, और न ही इतना धन-दौलत है कि किसी अस्पताल में जाकर इलाज करा सकें।
अस्पताल, ऑक्सीजन, इंजेक्शन और बेड के लिए संघर्ष, जीवन जीना जैसे एक जंग हो चुका है। इस स्थिति में आशा की एक किरण नजर आई- सेवा भारती काशी विभाग प्रशासन के सहयोग से घर-घर कोरोना मेडिकल किट बांट रही है। कुछ लोगों को इसकी सूचना मिलते ही जैसे जान में जान आ गई। आती भी क्यों न, काशी के हर कोने में सेवा भारती के कार्यकर्ता प्रशासन द्वारा प्रदत्त कोरोना की दवा मरीजों के निवास स्थान पर पहुँचाने में लगे हैं। ये कार्यकर्ता मानते हैं कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। सेवा में ईश्वर का वास होता है।
सेवा भारती की इस सेवा का नगर में असर भी देखने को मिल रहा है। धीरे-धीरे अब अच्छी खासी संख्या में मरीज़ कोरोना से ग्रसित व लक्षण युक्त मरीज़ ठीक होने लगे हैं। स्वस्थ हुए लोगों की शुभकामनाएं व आशीर्वाद मिलने लगा है। सेवा कार्यकर्ता सैकड़ों ऐसे बुजुर्ग, वरिष्ठ और असहाय लोगों तक पहुंच रहे हैं, जिनका घर से निकलना मुश्किल हो रहा था। वे चल नहीं सकते थे। बेटा-बहू और बच्चों ने उन्हें अकेला छोड़ दिया था। ऐसी स्थिति में जब सेवा कार्यकर्ता उनके निवास स्थान पर दवा लेकर पहुंचता है और उनकी कुशल क्षेम पूछता है। उसके बाद बताता है कि सेवा भारती की तरफ से दिन-रात फोन पर मरीज़ों की समस्या व समाधान के लिए डॉ पवन, डॉ शुभम और डॉ प्रवीण लगे हैं, किसी भी तरह की समस्या होने पर उनसे सम्पर्क किया जा सकता है, लोग भावुक हो उठते हैं।
कई लोग तो जीवन की आस ही छोड़ दी थी। वे कहते हैं, आप लोग भगवान बनकर आए हैं। आप लोगों का भगवान भला करे, बहुत-बहुत आशीर्वाद, ऐसी असंख्य शुभकामनाएं ही सेवा कार्यकर्ताओं के अदम्य ऊर्जा का स्रोत है और वो इस विकट परिस्थितियों में भी अपना सेवा कार्य दुगनी ताकत से सम्पन्न कर रहे हैं। सेवा कार्यकर्ता औसतन नित्य 200 से ज्यादा मरीज़ों को घर-घर जाकर दवा पहुँचा रहे हैं। संघ व सेवा भारती के कार्यकर्ता कोरोना त्रासदी में दवा वितरण व सेवा का कार्य करने में एक जुनून की तरह लगे हैं। पूरे वाराणसी में सेवा भारती के इस कार्य की सराहना हो रही है।
काशी प्रान्त की सेवा भारती (युवा भारती) की टोली प्रान्त के अध्यक्ष राहुल सिंह के साथ रात-दिन मेडिकल किट वितरण कार्य को बखूबी अंजाम दे रही है। युवा भारती काशी प्रान्त के संरक्षक हिमांशु राज़ का कहना है, “सेवा बस्ती, दलित वंचित पीड़ित व असहाय व्यक्ति की किसी भी तरह की मदद के बाद उनके मुख से निकला वाक्य “बनल रहा”, “जुग-जुग जिया बच्ची” ही हम सेवा कार्यकताओं की खुराक है। सेवा भारती काशी ने माधव सेवा प्रकल्प को एक मिनी अस्पताल में परिवर्तित कर दिया है। ऑक्सीजन, बेड व अन्य सुविधाओं के साथ यहाँ पोस्ट कोविड के मरीज़ों की योग्य चिकित्सकों की देख रेख में सेवा की जा रही है।”
कोरोना से जंग अभी भी जारी है। काशी प्रान्त युवा भारती के अध्यक्ष प्रशान्त त्रिपाठी, सचिन मिश्र (अध्यक्ष दक्षिण भाग), डॉ केएन पांडेय (संरक्षक महानगर), अंकित शर्मा (उपाध्यक्ष- दक्षिण) सहित सेवा कार्यकर्ता वैभव, सक्षम, अबु हाशमी, हेमंत, अमृता राय, गोपाल शाही, नंद किशोर, दीपेश, शशि प्रजापति व अन्य के साथ रात-दिन सेवा कार्य में समर्पित हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई मरीज़ स्वस्थ होने के बाद सेवा कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवा सतत प्रदान कर रहे हैं।

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