ब्लैक के मुकाबले सफेद फंगस ज्यादा घातक: डॉ. बीपी त्यागी

जितेन्द्र बच्चन/राष्ट्रीय जनमोर्चा
गाजियाबाद। कोरोना महामारी से 46 दिन बाद एक भी मौत नहीं हुई। रविवार को यह खबर जहां राहत भरी मिली, वहीं ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस ने महामारी का रूप ले लिया है। जिले में यह तेजी से फैल रहा है। व्हाइट फंगस से मरीज की जान भी जा सकती है और इसका इलाज भी मंहगा है। राजनगर में आरडीसी स्थित हर्ष ईएनटी अस्पताल के निदेशक डॉक्टर बीपी त्यागी कहते हैं, ‘ब्लैक फंगस के मुकाबले व्हाइट फंगस ज्यादा घातक है। उनके अस्पताल में एक सप्ताह में 7 मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें व्हाइट फंगस का संक्रमण मिला है। सांस फूलना, सीने में दर्द और बोलने में परेशानी इसके लक्षण हैं।’
डॉ. बीपी त्यागी के अनुसार व्हाइट फंगस की चपेट में आए डॉ. हरि प्रकाश (55), राजू प्रसाद (45), धर्मेंद्र (38), रामजी लाल (72), सुशील सिंह (35), शकुंतला देवी (52) और अरुणा सिंह (42) हर्ष ईएनटी अस्पताल में भर्ती थे। इनमें से हरि प्रकाश और राजू प्रसाद समेत तीन मरीज ठीक हो गए हैं। अरुणा सिंह को उनके स्वजन नोएडा के एक निजी अस्पताल में ले गए हैं। डॉ. त्यागी बताते हैं, ‘व्हाइट फंगस असामान्य और अनोखा है। ब्लैक फंगस के मुकाबले इसके मामले बहुत कम आते हैं। स्टेरायड के अधिक प्रयोग से ही इसका संक्रमण भी बढ़ता है।’
डॉ. त्यागी ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को बताया कि ब्लैक और व्हाइट फंगस से पीड़ितों में 95 फीसद से अधिक मधुमेह के मरीज हैं। मधुमेह के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिस कारण ये दोनों फंगस हमला करते हैं। उनके मुताबिक COVID-19 रोगियों में सफेद फंगस होने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि यह फेफड़ों को प्रभावित करता है और इसके लक्षण कोरोना वायरस की तरह पैदा होते हैं। जिन लोगों में प्रतिरक्षा कमजोर होती है जैसे मधुमेह, कैंसर के रोगी और जो लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हैं, उन्हें विशेष ध्यान रखना चाहिए। उनमें जोखिम अधिक होता है। यह उन कोरोना वायरस रोगियों को भी प्रभावित कर रहा है जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।
बचाव के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी:
डॉ त्यागी ने बचाव के लिए लोगों से कहा है कि वे स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। क्योंकि फ़ंगस तंग और आर्द्र स्थानों में बढ़ता है। खानपान में भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बिना धुले फल, सब्जियां और अधिक समय तक रेफ्रिजरेट किए गए खाने से बचना चाहिए। लोगों को रोजाना अपने मास्क धोना चाहिए या नए मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आपके आस-पास नियमित रूप से साफ-सफाई होनी चाहिए।
काले फंगस से सस्ता है सफेद फंगस का इलाज:
लेकिन काला या सफेद फंगस का इलाज बहुत महंगा है, इसलिए मरीजों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। ब्लैक फंगस की दवा भी अभी जिले में उपलब्ध नहीं है। इससे भी मरीजों को परेशानी हो रही है। सरकारी स्तर पर दवा मुहैया कराने के प्रयास जारी हैं। ऐसे में हर किसी को निजी अस्पतालों में इलाज करा पाना संभव नहीं है? इस सवाल के जवाब में डॉ बीपी त्यागी ने बताया, ‘इसका इलाज काले फ़ंगस से सस्ता होता है लेकिन अगर डाययग्नोसिस बन जाये। इसकी दवा भी गुर्दे को amphoteracin b की तरह ख़राब नहीं करती।’

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