राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
भोपाल। झीलों की नगरी के एक होटल में साहित्यिक संस्था विश्व मैत्री मंच का 12वां राष्ट्रीय सम्मेलन एवं 25वां हेमंत स्मृति कविता सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। तीन सत्रों अलंकरण सत्र, लघुकथा सत्र और काव्य सत्र के तहत सभी कार्यक्रम संपन्न हुए। महिमा श्रीवास्तव वर्मा ने मां सरस्वती की वंदना की। मंच की संस्थापक, अध्यक्ष व वरिष्ठ लेखिका संतोष श्रीवास्तव ने सभी के स्वागत में नवाज देवबंदी का शेर सुनाया, “यह मत सोच राह के जख्म कितने गहरे हैं, बस यह सोच कि मंजिल का सुकून कितना बड़ा है…।”
डा. प्रमिला वर्मा ने “हेमंत परिचय” दिया। जबकि शेफालिका श्रीवास्तव एवं निर्णायक उद्बोधन डॉ. नीलिमा रंजन ने किया। इसके बाद श्रीमती रूबी मोहंती, डॉ. अलका अग्रवाल सिगतिया, श्रीमती शकुंतला मित्तल, डॉ. विद्या सिंह, डॉ. रानी श्रीवास्तव, सुनील दुबे वृक्षमित्र, विवेक रंजन श्रीवास्तव, शंकारानंद, श्रीमती कुसुम भट्ट, श्रीमती रजनी गुप्त, श्रीमती जया आर्या, श्रीमती एकता अमित व्यास, श्रीमती रत्ना पांडेय, सुश्री आशा सिंह गौर, देवेंद्र श्रीवास्तव एवं बद्र वास्ती को प्रतीक चिन्ह, शॉल, श्रीफल एवं पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।
अलंकरण सत्र की अध्यक्षता पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत ने किया। मुख्य अतिथि प्रेम जनमेजय, विशिष्ट अतिथि राम स्वरूप दीक्षित और ऋषि कुमार शर्मा थे। हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार के अलावा साहित्य और समाज के लिए काम करने वाले अन्य लोगों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया। मंच संचालन संस्था महासचिव मुजफ्फर इक़बाल सिद्दीकी और धन्यवाद ज्ञापन जया केतकी ने किया।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता श्रीमती कांता राय ने की। मुख्य अतिथि डॉ शरद सिंह, विशिष्ट अतिथि वन्या जोशी एवं डॉ क्षमा पांडेय थी। गोकुल सोनी, डॉ. विद्या सिंह, सुश्री शकुंतला मित्तल, सुश्री मनवीन कौर, डॉ. शुभ्रा, सुश्री मनोरमा, सत्येन्द्र सिंह, सुश्री मृदुल त्यागी, सुश्री सरोजलता सोनी, सुश्री लता तेजेश्वर, डॉ. अलका अग्रवाल सिग्तिया एवं ऋचा शर्मा ने लघुकथा पाठ किया। इस सत्र का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ साहित्यकार घनश्याम मैथिल ने किया।
तीसरे और अंतिम सत्र के मुख्य अतिथि संजीव कुमार, इकबाल मसूद एवं संजय सक्सेना थे। सारस्वत अतिथि के तौर पर कर्नल गिरिजेश सक्सेना ने मंच को सुशोभित किया। कविताओं, गजल और गीतों के निर्झर मुग्ध भाव से झरे। सुश्री आशा सिंह गौर, विजयकांत वर्मा, आबिद काजमी, साकेत सुमन चतुर्वेदी, डॉ रत्ना पांडेय, सुश्री रूबी मोहंती, मनोज अबोध, सुश्री रमा त्यागी, केपी गुप्ता, विपिन पवार, सुश्री जया विलतकर, डॉ. रेणु श्रीवास्तव, सुश्री जया आर्य, सुश्री मधूलिका सक्सेना, सुश्री राजकुमारी चौकसे, ब्रजभूषण मिश्र, अशोक व्यग्र ने कविता पाठ किया। संचालन डा. विनीता राहुरीकर और धन्यवाद ज्ञापन रानी सुमिता ने किया।
कैलाश चंद्र पंत को पद्मश्री घोषित किए जाने के उपलक्ष में एवं डॉ संजीव कुमार को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने पर संस्था द्वारा उनका अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर भोपाल, झांसी, दिल्ली, मुंबई, इंदौर, सतना, टीकमगढ़, देहरादून, पुणे, गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा, अहिल्या नगर आदि के साहित्यकार व पत्रकार उपस्थित रहे।


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