रोजगारपरक व तकनीक शिक्षा को बजट में बढ़ावा : डॉ. भरत सिंह

राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। केंद्रीय बजट 2026–27 पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रिंस इंस्टीट्यूट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजी (PIIT) के चेयरमैन प्रोफेसर (डॉ.) भरत सिंह ने इसे विकसित भारत की दिशा में जन कल्याणकारी बताया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को हर क्षेत्र में अवसर देने के लिए बजट में शिक्षा, कौशल विकास, तकनीक और रोजगार पर विशेष जोर दिया गया है। खासकर एआई, तकनीकी शिक्षा और इंडस्ट्री-लिंक्ड ट्रेनिंग से युवाओं को भविष्य के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
डॉ भरत सिंह देश की प्रतिष्ठि व राष्ट्रीय संस्था ‘समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के मुख्य संरक्षक भी हैं। जनकल्याणकारी नीतियों की नजर से भी वे बजट को देखते हैं। उन्होंने बताया कि पीआईआईटी पहले से ही नई तकनीक, एयर गुरुकुल एवं स्किल डेवलपमेंट को प्राथमिकता देकर युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है। नए बजट के हिसाब से भी एआई आधारित स्वास्थ्य इनोवेशन को बढ़ावा देने से तकनीकी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को नई दिशा मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि रविवार, 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और पॉलिटेक्निक संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। इस बजट का मुख्य फोकस शिक्षा को रोजगार से जोड़ना और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देना है। डॉ सिंह कहते हैं, वित्त मंत्री ने एजुकेशन सेक्टर के लिए 139289 करोड़ रुपये के आवंटन का ऐलान किया है। शिक्षा से रोजगार तक के रास्तों का अध्ययन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का भी गठन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नए बजट में विशेषकर यूपी के लिए तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पॉलिटेक्निक संस्थानों में अधोसंरचना के सुधार हेतु 639.96 रुपये करोड़ का प्रावधान है। इसके तहत प्रयोगशालाओं के नवीनीकरण, ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना, और एआई (AI) जैसी नई तकनीकों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।
डॉ भरत सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पेश बजट पर रोजगारपरक शिक्षा (Employment-Oriented Education) और कौशल विकास (Skill Development) को बढ़ावा देने के लिए आभार जताया है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है शिक्षा को सिर्फ डिग्री तक सीमित न रखकर उसे एम्प्लॉयबिलिटी (रोजगार क्षमता) से जोड़ने पर जोर दिया जाए। जिससे शिक्षा पूरी करने के उपरांत विद्यार्थियों को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिल सके और युवा आत्मनिर्भर बन सकें।

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