राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नयी दिल्ली। युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (न्यास) ने 10वें स्थापना दिवस एवं हिंदी पखवाड़ा के तहत नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के द्वितीय तल पर वार्ता हाल में कवि गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ ब्रजपाल सिंह संत ने की। दिल्ली रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक सुनील कुमार शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
17 सितंबर को आयोजित गोष्ठी में सर्व प्रथम मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने गत दस वर्षों की साहित्यिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंच अनेक व्यवधान होते हुए भी हिंदी साहित्य के सेवा मार्ग से कभी विचलित नहीं हुआ। देश के कोने -कोने से अनेक अपरिचित साहित्यकारों को साहित्यिक संसार के सामने लाकर उन्हें पहचान दिलाकर सम्मानित किया है। हिंदी साहित्य के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, मुंशी प्रेमचंद और अमीर खुसरो जैसे साहित्यकारों की स्मृति में इस मंच ने सभी शीर्ष पुरस्कार स्थापित कर उनके अवदान को रेखांकित किया है।
कार्यकारिणी का जताया आभार :
उन्होंने बताया कि इस वर्ष से भारतेंदु हरिश्चंद्र शीर्षस्थ सम्मान की राशि बढ़ाकर 11 हज़ार रुपये कर दी गई है। इस उन्नत पुरस्कार राशि का प्रथम पुरस्कार लखनऊ के हिंदी के वरिष्ठतम साहित्यकार अनूप श्रीवास्तव को आगामी 19 नवम्बर को प्रदान किया जाएगा। साथ ही मंच की निरंतर उन्नति में सभी कार्यकारिणी सहयोगियों का विशेष आभार व्यक्त किया। इसके बाद ओम प्रकाश शुक्ल महासचिव, वसुधा कनुप्रिया सहायक महासचिव, शारदा मदरा अध्यक्ष दिल्ली प्रदेश और सुरेश पाल वर्मा जसाला ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कविता पाठ में आजाद को याद किया :
सुश्री मिलन सिंह ‘मधुर’ द्वारा मा वाणी की वन्दना की गई और सुश्री शारदा मदरा द्वारा मंच का गीत गाया गया। जाने-माने साहित्यकार बृजपाल संत ने शानदार कविता पाठ करते हुए वीर बलिदानी चन्द्रशेखर आजाद को याद किया। मुख्य अतिथि सुनील कुमार मिश्र ने अवध के मिथिला पर केन्द्रित मधुर कविता पढ़ी और ओजपूर्ण वाणी से वीर रस की कविताएं सुनाई। वंदना गोयल ने अपनी कविता पाठ में बचपन को याद किया। सुश्री मिलन सिंह मधुर ने हिंदी के उन्नयन की कामना करते हुए अनुपम गीत का काव्य पाठ किया।
सुरेश पाल वर्मा जसाला ने बांधा समां :
शारदा मदरा, विनय विक्रम सिंह, शिव प्रभाकर ओझा, कल्याणी झा और कवि ओम प्रकाश शुक्ल द्वारा भी हिंदी पर केन्द्रित काव्य पाठ किया गया।
वसुधा कनुप्रिया ने चक्रण छंद का पहली बार काव्य पाठ किया। जबकि सुरेश पाल वर्मा जसाला ने नयी विधा चक्रण छंद का पाठ किया और वीर रस की कविताएं अपनी ओजस्वी वाणी में सुनाकर समां बांध दिया।
साहित्यकार उपस्थित रहे :
गोष्ठी में नरेश कुमार शामली, विनय विक्रम सिंह, ओम प्रकाश शुक्ल, डॉ. पवन विजय, रामकिशोर उपाध्याय, डॉ ब्रजपाल सिंह संत एवं सुश्री मिलन सिंह, मनीषा यादव, मनीषा सक्सेना आदि साहित्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम अध्यक्ष बृजपाल संत ने काव्य पाठ की समीक्षा की। मंच का संचालन सुरेश पाल वर्मा जसाला ने किया।


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