‘खिड़की पर बैठी कविता’ पुस्तक का लोकार्पण

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। वैशाली स्थित मगध स्काईटेक में साहित्य एवं समाज को समर्पित संस्था सरन शब्द-गुंजन के तत्वावधान में लेखिका श्रीमती लक्ष्मी अग्रवाल के काव्य-संग्रह ‘खिड़की पर बैठी कविता’ का भव्य लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया।
शुक्रवार, 15 मई को आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सविता चड्ढा ने की। मुख्य अतिथि अशोक गुप्ता और विशिष्ट अतिथि डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति एवं डॉ. नीरजा मेहता ‘कमलिनी’ रहे। आयोजक विकास अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
मंच संचालन नयन नीरज ‘नायाब’ ने किया। कार्यक्र में डॉ. मनोज कामदेव, श्रीमती संगीता वर्मा, श्रीमती बबली सिन्हा वान्या, गुंजन अग्रवाल, श्रीमती पूजा श्रीवास्तव, देवेन्द्र प्रकाश शर्मा, भूपेंद्र राघव, श्रीमती दीपिका वल्दिया, डॉ. अर्चना गर्ग, श्रीमती संगीता पीयूष गुप्ता, डॉ. ऋतु अग्रवाल, सुश्री जोया, हिमांशु शुक्ला, अशोक कुमार, लवनीश सिंह एवं राजकुमार चौहान उपस्थित रहे।
डॉ. सविता चड्ढा ने पुस्तक में ईश वंदना को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जो स्त्रियाँ घर और कार्यक्षेत्र दोनों में संतुलन बनाकर चलती हैं, वही सही मायनों में सफल होती हैं। उन्होंने कहा कि सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए परिवार और घर से मुंह मोड़ लेना वास्तविक सफलता नहीं कहलाती। मुख्य अतिथि अशोक गुप्ता, विशिष्ट अतिथि डॉ. नीरजा मेहता ‘कमलिनी’ और डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति ने भी अपने विचार रखे। नयन नीरज ‘नायाब’ ने कहा कि पुस्तक में पिता की छांव, माँ-बेटी का रिश्ता, मिट्टी से जुड़ाव और जीवन के अनेक महत्वपूर्ण मनकों को सुंदर भावभूमि के साथ पिरोया गया है।
लेखिका श्रीमती लक्ष्मी अग्रवाल ने पुस्तक के नामकरण के पीछे की भावना साझा किया। कार्यक्रम में नन्हीं गुंजन की मनमोहक नृत्य प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। समारोह में ट्रू मीडिया, काव्य मंजरी मंच, डॉ. सविता चड्ढा, डॉ. अर्चना गर्ग, श्रीमती दीपिका वल्दिया, श्रीमती पूजा श्रीवास्तव एवं श्रीमती बबली सिन्हा ‘वान्या द्वारा लेखिका श्रीमती लक्ष्मी अग्रवाल को साहित्यिक योगदान हेतु विशेष सम्मान प्रदान किया गया।

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