सैयद अली मेहदी / राष्ट्रीय जनमोर्चा
नई दिल्ली। ईरानी राष्ट्रपति मरहूम इब्राहिम रईसी, विदेश मंत्री अब्दुल्लाहयान और अन्य की शहादत पर भारत स्थित ईरानी दूतावास में एक शोक सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर कई धर्मों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत में ईरान के राजदूत डॉ. इरज इलाही ने इब्राहिम रईसी को याद करते हुए कहा कि शहीदों का जिक्र करना मेरे लिए बहुत कठिन क्षण है। जनाब राईसी ने आर्थिक मामलों को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, 5000 से अधिक बंद कारखानों को खोला और उत्पादन बढ़ाने व बेरोजगारी दूर करने की दिशा में काम किया।
उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति मरहूम इब्राहिम रईसी की भारत से विशेष लगाव था। मध्य पूर्व के देशों के बीच संबंध स्थापित करने में उनकी विशेष रुचि थी और हम उनकी भारत यात्रा की तैयारी कर रहे थे, जिसमें वे स्वयं चाहते थे कि यात्रा ऐसी हो कि भारत-ईरान संबंधों में और ज्यादा नजदिकियां स्थापित हों।
ईरान कल्चर हाउस के कल्चर काउंसलर डॉ. फरीदउद्दीन फरीदअसर ने शोक सभा में आए लोगों का स्वागत किया। सामाजिक कार्यकर्ता मास्टर जाहिद हुसैन ने सभी धर्मों के प्रमुखों का परिचय कराया। मौलाना शाहीन कासमी ने ईरान के राष्ट्रपति मरहूम इब्राहीम रईसी और उनके अन्य साथियों की शहादत पर शोक जताते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
शोक सभा का संयोजन जाहिद हुसैन ने किया था। वहां मौजूद सैय्यद काशिफ अली निजामि, विवेक मुनि, फादर बेंटो, सरदार परमजीत सिंह चंदोक, मोहम्मद ताहिर सिद्दीकी, अंबिका (अम्मा जी) प्रेरणा शर्मा भाटिया, आचार्य सुरेश जैन, रेखा गुप्ता आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये और ईरान के प्रति सहानुभूति जताई। इस बीच दूतावास के समस्त स्टाफ ने मेजबानी का दायित्व निभाया।


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