मेवाड़ में 24 विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट के शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित सेमिनार में 24 विद्यार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये। विषय था- ’व्यावसायिक संवर्द्धन के लिए शिक्षक शिक्षा में एकीकृत दृष्टिकोण और स्थिरताः वर्तमान परिप्रेक्ष्य और भविष्य की संभावनाएँ।’ एनसीईआरटी में शैक्षिक सलाहकार डॉ. स्वाति जैन ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि शिक्षक शिक्षा में स्थिरता समाहित करे। शिक्षक समाज को पर्यावरणीय जागरूकता, सामाजिक जिम्मेदारी और समग्र विकास की दिशा में मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
सेमिनार में प्रतिभागियों ने प्रौद्योगिकी के एकीकरण, स्थायी शिक्षण विधियों और समावेशी शिक्षा जैसे विषयों पर शोध प्रस्तुत किए। अंतरविभागीय दृष्टिकोण, निरंतर पेशेवर विकास और शिक्षक शिक्षा में स्थिरता की आवश्यकता, भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के सुधार और नवाचार की दिशा में ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी वक्ताओं ने प्रकाश डाला।
सेमिनार में विभाग की ओर से प्रकाशित स्मारिका का लोकार्पण भी किया गया। इस दौरान विभाग प्रमुख डॉ. गीता रानी का मानना था कि भविष्य की शिक्षा प्रणाली में स्थिरता, समावेशिता और प्रौद्योगिकी का समावेश बेहद आवश्यक है। ताकि शिक्षक न केवल शैक्षिक, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय संदर्भों में भी अपनी भूमिका निभा सकें।
विभाग की शिक्षिका जैना सुशील और डॉ. किरण जोशी कार्यक्रम के समन्वयक रहे। इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने इस प्रकार के सेमिनारों को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और जानकारी दी कि मेवाड़ समय-समय पर विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए इस प्रकार के विशेष सेमिनार आयोजित करने में अपनी प्रमुख भूमिका निभाता है।

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