मुख्यमंत्री की पहल से नून नदी को मिला नया जीवन

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
लखनऊ/कानपुर। कानपुर नगर की करीब-करीब खत्म हो चुकी नून नदी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पुन: जीवनदान मिल गया है। अब नदी दोबारा से बहने लगी है। नक्शे से गायब, गाद से भरी, अतिक्रमण से दब चुकी थी, अब जलधारा बनकर फिर से लोगों को जीवन देने लगी है। लेकिन यह परिवर्तन यूं ही नहीं आया, बल्कि इसके पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच और प्रतिबद्धता है, जिन्होंने ‘एक जिला–एक नदी’ पहल के माध्यम से राज्य की मृतप्राय नदियों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच ने यह साबित कर दिया कि परिवर्तन की सबसे बड़ी धारा संकल्प से निकलती है और यही नून नदी की असली कहानी है। नून नदी का यह पुनर्जागरण न केवल कानपुर नगर के लिए, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है। यह बताता है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक सक्रियता और जनता की भागीदारी एक साथ आती है, तो मिट चुकी नदियां भी फिर से जीवनदायिनी बन सकती हैं।
नून नदी, जो कभी बिल्हौर, शिवराजपुर और चौबेपुर के खेतों को सींचती थी, बच्चों के खेल की साक्षी थी और ग्रामीण संस्कृति का अभिन्न हिस्सा थी, वह नदी उपेक्षा की शिकार हो चुकी थी। न तो उसमें पानी बचा था, न कोई पहचान। लेकिन योजना के आदर्श मॉडल के तहत चयन कर जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह और मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन के नेतृत्व में इस कार्य को एक सरकारी योजना से अधिक जनभागीदारी अभियान बनाया गया। करीब 48 किमी. लंबी नून नदी का पुराना रास्ता खोजने में राजस्व अभिलेख, ग्रामीणों की यादें, ड्रोन सर्वेक्षण और सैटेलाइट इमेज का सहारा लिया गया। इसके बाद मनरेगा योजना के तहत सफाई, खुदाई, गाद निकासी और तटबंध निर्माण का कार्य आरंभ हुआ।
करीब 6,000 श्रमिकों ने 58 ग्राम पंचायतों से मिलकर करीब 23 किलोमीटर की खुदाई और सफाई का कार्य किया। मशीनों की जगह श्रमिकों के श्रम का उपयोग किया गया, जिससे न केवल काम की संवेदनशीलता बनी रही, बल्कि रोज़गार भी मिला। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग ₹57 लाख खर्च हुए और 23,000 से अधिक मानव दिवस का सृजन हुआ। जुलाई के पहले सप्ताह में नदी के दोनों तटों पर 40,000 से अधिक पौधे रोपे गए, जिनमें नीम, पीपल, पाकड़, सहजन जैसे वृक्ष प्रमुख हैं। यह पौधे न केवल हरियाली को बढ़ावा देंगे बल्कि जलवायु संतुलन, पशु-पक्षियों के आवास और मृदा संरक्षण में भी सहायक होंगे।
कानपुर नगर की मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) दीक्षा जैन ने बताया कि मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप नून नदी को चिह्नित किया गया था। प्राइवेंट कंपनियों, स्थानीय उद्योगों की भी इसमें मदद ली गई। नतीजा बेहद उत्साहजनक रहा। जो नदी बिल्कुल खत्म हो चुकी थी आज उसमें बड़ी मात्रा में जल संचयन हो रहा है। नदी के पुनर्जीवन की प्रगति देखकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह है।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*