ब्रह्माकुमारीज अहिंसा के सच्चे भक्त हैं : महंत नानक दास महाराज

राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
गुरुग्राम (हरियाणा)। ब्रह्माकुमारीज के गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में “आध्यात्मिकता द्वारा सनातन संस्कृति की रक्षा” विषय पर शुक्रवार को तीन-दिवसीय अखिल भारतीय साधु संत महासम्मेलन शुरू हो गया। देश भर के प्रमुख साधु-संत, धर्माचार्य और आध्यात्मिक विद्वान इस सम्मेलन में सनातन मूल्यों के संरक्षण और आत्म-जागरण पर चर्चा के लिए एकत्र हुए हैं।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में अनेक संतों ने अपने विचार रखे। बड़ी खाटू नागौर राजस्थान से आए अखिल भारतीय कबीर मठ सतगुरु कबीर आश्रम सेवा संस्थान के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत (डॉ.) नानक दास महाराज ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज देश, धर्म और जाति से ऊपर उठकर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पवित्रता के आधार से नई दुनिया की पुनर्स्थापना धर्म सत्ता ही कर सकती है। हमें सिर्फ बाहर से नहीं बल्कि अंदर से साधु बनने की जरूरत है। ब्रह्माकुमारीज भाई बहन अहिंसा के सच्चे भक्त हैं।
महंत (डॉ.) नानक दास महाराज यहां अखिल भारतीय साधु-संत महासम्मेलन में विशेष आमंत्रण पर पधारे हैं। उन्होंने स्वागत भाषण में कहा कि विश्व के 208 देशों में ओम शांति केंद्र के माध्यम से मानवता के कल्याण हेतु मुरली सुनाई जाती है। जो मन के विकारों को बहार निकालती है। इस अवसर पर संत-महात्माओं के साथ महंत (डॉ.) नानक दास का भी माला, शॉल, अंगवस्त्र और अभिनन्दन पत्र भेंट कर उनका स्वागत-सत्कार किया गया।
तीन दिवसीय महासम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों से साधु, संत, मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर, आचार्य, कथावाचक, पुजारी, कर्मकांडी विद्वान, ब्राह्मण, ज्योतिषाचार्य, धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि आदि भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में भारतीय सनातन धर्म संस्कृति के अनुरूप आध्यात्मिक जगत की यात्रा में आगे बढ़ते हुए सकारात्मक सोच के साथ मानवता की रक्षा करने का संदेश दिया गया। क्योंकि इस महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ही आध्यात्मिकता द्वारा सनातन संस्कृति की रक्षा करना है।
आज शनिवार, 25 अप्रैल को आध्यात्मिक संवाद होना है। सनातन परंपराओं और मूल्य-आधारित जीवनशैली को सशक्त बनाने पर चर्चा की जाएगी। ब्रह्माकुमारीज पद्धति द्वारा मानसिक शांति के लिए विशेष राजयोग ध्यान सत्र भी बताया जाएगा। इसके अलावा सामाजिक संतुलन और शांति के लिए आध्यात्मिकता की भूमिका पर मंथन किया जाएगा। अंत में संतों और धर्माचार्यों के योगदान के लिए सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। ऐसे में यह महासम्मेलन वर्तमान समय में नैतिक पुनर्निर्माण और आध्यात्मिक जागृति के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

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