गाजियाबाद में डॉ. कुंअर बेचैन की 84वीं जयंती पर सजी कविताओं की महफिल

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। महाकवि डॉ. कुंअर बेचैन की 84वीं जयंती पर बुधवार को दूधेश्वर नाथ मंदिर में डॉ. कुँअर बेचैन स्मृति न्यास ऑस्ट्रेलिया और साहित्यिक संस्था ‘काव्य कोना’ द्वारा शानदार कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। बरसात के बावजूद बड़ी संख्या में काव्य प्रेमी पहुंचे और पांच घंटे से भी अधिक समय तक कविताओं की महफिल का आनंद लिया।
8 जुलाई की शाम दूधेश्वर नाथ मंदिर के नवनिर्मित सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कवि पदमश्री डॉ अशोक चक्रधर ने की। उन्होंने डॉ. बेचैन से जुड़े कई संस्मरण सुनाए। उन्होंने कहा कि डॉ. कुँअर बेचैन ने एक से बढ़कर एक अच्छे गीत जहां लिखे, वहीं बहुत-सी शानदार गजलें भी लिखीं। पॉजिटिविटी डॉ. बेचैन का बहुत बड़ा गुण था, जिसे हम सभी रचनाकारों को जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शहर विधायक संजीव शर्मा ने कहा कि डॉ. बेचैन के कारण साहित्यिक क्षेत्र में गाजियाबाद का नाम पूरी दुनिया में मशहूर हुआ। जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दूधेश्वर नाथ मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरी ने कहा कि साहित्यिक गतिविधियां किसी भी शहर के लिए प्राण वायु का काम करती हैं। श्रीमहंत नारायण गिरी ने आयोजन के लिए डॉ. बेचैन के पुत्र प्रगीत कुँअर और पुत्रवधू डॉ. भावना कुँअर को भी आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में रहने के बावजूद वो अपने पिता की गृह नगरी में उनकी स्मृतियों को बनाए रखने का महान कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन कर रहे शायर राज कौशिक ने भी प्रगीत कुँअर, डॉ. भावना कुँअर और पंकज जिंदल के योगदान की सराहना की।
इसके बाद काव्य रस की धारा की शुरुआत दिल्ली से पधारे शायर कर्नल संजय चतुर्वेदी के शेरों ‘नयी नस्लों को जीने के नये नुस्ख़े सिखाता हूँ, जहाँ बारिश नहीं होती वहीं पौधे लगाता हूँ…’ पर लोगों ने खूब तालियां बजाईं। विश्व विख्यात शायर विजेंद्र सिंह परवाज के एक-एक शेर पर भी लोगों की दाद मिली।
शायर राज कौशिक के इन अशआर पर लोगों ने खूब तालियां बजाई- ‘सौ बहाने हैं जहां पर तो रुलाने के लिए, इक बहाना ढूंढ लो हंसने हंसाने के लिए। शौहरतों की ख्वाहिशों का ये तमाशा खूब है, लोग पंजों पर खड़े हैं क़द बढ़ाने के लिए…’ साथ ही पुणे से आए प्रसिद्ध शायर राजेश त्रिपाठी ने अपनी ग़ज़ल प्रस्तुत की।
डॉ. तारा गुप्ता, गजरौला से पधारीं डॉ मधु चतुर्वेदी, कवयित्री डॉ. तूलिका सेठ, डॉ कुंअर बेचैन के भतीजे युवा कवि प्रतीक सक्सेना, कवयित्री डॉ वीणा मित्तल, कवयित्री कोमल रस्तोगी, शैलजा सक्सेना, नेहा वैद्य, रचना वार्ष्णेय की रचनाओं को श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के स्वागत अध्यक्ष समाजसेवी राम अवतार जिंदल ने सभी रचनाकारों का स्वागत किया। श्रीमहंत नारायण गिरी ने भगवान दूधेश्वर नाथ का चित्र देकर और दुपट्टा पहना कर रचनाकारों का अभिनंदन किया। वरिष्ठ भाजपा नेता पृथ्वी सिंह कसाना, चीफ वार्डन ललित जायसवाल, विशाल कौशिक, जय भगवान गर्ग, राकेश गुप्ता, विजय मित्तल, तरुण गोयल (गांधर्व संगीत महाविद्यालय), सत्येन्द्र आत्रे, डॉ पुष्पा जोशी, डॉ सुरभि सक्सेना व अशोक गोयल विशेष अतिथियों के रूप में उपस्थित रहे।

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