राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नयी दिल्ली। पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन (PWA) ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे कई पत्रकारों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की तीखी आलोचना की है। संगठन के अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र बच्चन ने कहा है कि 10 और 11 अक्टूबर 2026 को कई डिजिटल और प्रिंट मीडिया के पत्रकारों को प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद हिरासत में लिया गया। कुछ पत्रकारों के फोन और उपकरण भी जब्त कर लिए गए। पुलिस की यह ज्यादती है।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और प्रेस की स्वतंत्रता को भी इसी अनुच्छेद का हिस्सा माना गया है। यह कानून पत्रकारों के रिपोर्टिंग करने, सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने और जनहित के मुद्दों को सामने लाने के अधिकार की रक्षा करता है।
श्री बच्चन ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले ही स्पष्ट किया था कि प्रदर्शनों के दौरान मीडियाकर्मियों को उनके पेशेवर दायित्वों को निभाने से नहीं रोका जाना चाहिए। इसके बावजूद प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ कई पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। कई पत्रकारों के साथ बदसलूकी की खबरें आईं। कुछ पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की गई और कुछ को अलग-अलग जगहों पर प्रोटेस्ट को कवर करने के दौरान हिरासत में लिया गया। उन्हें बस में ले जाकर कहीं दूर छोड़ा गया। लोकतंत्र के लिए यह अच्छी बात नहीं है।
सूत्रों के हवाले से पता चला है कि जिन प्रमुख पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था, उनमें न्यूज़लॉन्ड्री के अश्विनी कुमार सिंह, आस्था सव्यसाची के अनमोल प्रीतम, स्क्रॉल (Scroll) के आयुष तिवारी, शोएब दानियाल, नवभारत टाइम्स के पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता, यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह, ध्रुव राठी, ऑल्ट न्यूज़ की किंजल, स्वतंत्र पत्रकार निधि सुरेश और एम. राजशेखर समेत कई दूसरे पत्रकारों के नाम भी शामिल हैं।
पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने मांग की है कि हिरासत में लिए गए सभी पत्रकारों की तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए। छीने गए फोन और उपकरण वापस किए जाएं। दिल्ली पुलिस को इस मामले में सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए। साथ ही प्रेस परिचय पत्र दिखाने के बाद भी पत्रकारों को हिरासत में लेने का आदेश देने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आचरण की जांच की जाए।


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