राष्ट्रीय जनमोर्चा। ब्यूरो
छपरा कार्यालय। संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा आज भी समाज और सरकारों के लिए उतना ही प्रासंगिक है, जितना उनके समय में थी। उनके विचार सामाजिक बदलाव, स्वावलंबन और मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की राह दिखाते हैं। उक्त बातें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को जेपी की 124वीं जयंती पर उनके जन्म स्थली रिविलगंज प्रखंड अंतर्गत सिताब दियारा के लाला टोला स्थित जेपी संग्रहालय परिसर में आयोजित समारोह को वर्चुअल संबोधित करते हुए कहीं। लोकनायक की जयंती पर जन्मस्थली में राजकीय सम्मान के साथ उन्हें नमन किया गया। इस दौरान सैकड़ों गणमान्य लोगों ने जेपी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके विचारों तथा संघर्षों को याद किया।
कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाने पर जताया अफसोस:
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने संबोधन में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संघर्षों और उनके योगदान को याद करते हुए समारोह में सशरीर उपस्थित नहीं हो पाने पर हाथ जोड़कर क्षमा मांगी। उन्होंने कहा कि नवरात्रि पूजा से जुड़ी व्यक्तिगत व्यस्तताओं के कारण वह सिताब दियारा नहीं पहुंच सके, जिसका उन्हें मलाल है। उन्होंने जल्द ही क्षेत्र में आने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि बिहार के आरा और उत्तर प्रदेश के बलिया को जोड़ने वाले सड़क पुल का कार्यारंभ करेंगे। उनके इस आश्वासन से क्षेत्र में आवागमन और संपर्क व्यवस्था को लेकर उम्मीदें बढ़ गई है।
स्वदेशी और स्वावलंबन से होगा समाज का कल्याण:
समारोह को संबोधित करते हुए जेपी ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने लोकनायक को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कहा कि स्वदेशी, स्वावलंबन और सहयोग की भावना से ही समाज का वास्तविक कल्याण संभव है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर सरकारें भी मजबूत बन सकती हैं। उन्होंने जेपी के विचारों को आत्मसात करने और उनके आदर्शों को जीवन में उतारने की जरूरत पर बल दिया। जेपी की जन्मस्थली पर आयोजित इस समारोह में लोकनायक के विचारों, लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सामाजिक परिवर्तन के लिए किए गए संघर्षों को याद किया गया। समारोह ने नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जुड़ने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का संदेश दिया। इस अवसर पर छपरा सदर के अनुमंडल पदाधिकारी नितेश कुमार और कला संस्कृति सह खेल पदाधिकारी डॉ विभा भारती ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन संजय भारद्वाज ने किया।


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