पालघर में साधुओं की नृशंस हत्या ने खाकी को किया शर्मिंदा : साध्वी ऋतम्भरा

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ द्वारा नृशंस हत्या से व्यथित वात्सल्य ग्राम की प्रमुख साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि कोरोना के विरुद्ध पूरे देश की पुलिस पूरी निष्ठा से लड़ाई लड़ रही है लेकिन पालघर में जो हुआ, उसने खाकी को शर्मिंदा कर दिया। उन्होंने दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की मांग की है।
वात्सल्य ग्राम, वृन्दावन की अधिष्ठात्री दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा ने मंगलवार को यहां एक बयान जारी कर कहा कि मैं मानती हूं कि महाराष्ट्र में मिली-जुली सरकार है लेकिन शिवसेना के उद्धव ठाकरे तो हैं न। वो बाल ठाकरे जिन्होंने भगवा को हमेशा अपनी आन-बान-शान का प्रतीक माना, उनके सुपुत्र के मुख्यमंत्रित्व में संतों की ऐसी निर्मम हत्या हो जाना, व्यथित कर देने वाली घटना है।

उन्होंने कहा, घटना से मेरा मन बहुत व्याकुल और व्यथित है। मैंने अपने जीवन में इतनी बर्बर हत्या होते नहीं देखी। एक दिवंगत सन्त की अन्त्येष्टि में सम्मिलित होने जा रहे जूना अखाड़ा के साधुओं सुशील गिरि एवं कल्पवृक्ष गिरि को सैकड़ों अमानुषिक लोगों की भीड़ ने पुलिस के सामने घेरकर लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला।
उन्होंने कहा कि ऐसे में प्रश्न उठता है कि घटना स्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने भीड़ को रोकने की कोई भी कोशिश क्यों नहीं की। यह एक ऐसी घटना है जिसने हमारे अंतर्मनों को झकझोर कर रख दिया है। नरभक्षियों के समान एक भीड़ नृशंसतापूर्वक असहाय संतों की हत्या करेगी और पुलिस मूकदर्शक बनकर देखेगी, कभी कल्पना भी नहीं की थी। यदि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने रिवाल्वर निकालकर दो-चार हवाई फायर कर दिए होते तो वो हिंसक भीड़ नियंत्रण में आ जाती।

साध्वी ने कहा, भारत में सनातन धर्म के विरुद्ध एक षड़यंत्र चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत वनवासियों और आदिवासियों को उसके खिलाफ करने की कोशिशें जारी हैं। संतों पर ऐसे हमले इसी षड़यंत्र का हिस्सा लगते हैं लेकिन मैं चेतावनी देना चाहती हूं कि यह देश भगवा है, यहां लाल सलाम चल नहीं सकता। संतों की भूमि पर संतों की हत्या एक ऐसा दंडनीय अपराध है, जिसे क्षमा नहीं किया जा सकता।

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