CBI ने एक करोड़ रिश्वत मामले में रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को किया गिरफ्तार

जितेन्द्र बच्चन
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है। उनके साथ चार अन्य लोगों को भी पकडा गया है। साथ ही दिल्ली, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और उत्तराखंड सहित 26 स्थानों पर सीबीआई ने छापे मारे हैं। तलाशी में नकदी समेत तमाम गैरकानूनी दस्तावेज बरामद हुए हैं।
सीबीआई प्रवक्ता आरके गौड़ के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी(वरिष्ठ रेलवे अधिकारी, निर्माण- II, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर, मालीगांव (असम),एक उप मुख्य अभियंता, एनएफआर, अगरतला, एक सहायक कार्यकारी अभियंता, एनएफ रेलवे (एनएफआर), अगरतला (त्रिपुरा), गुवाहाटी (असम) में स्थित एक निजी कंपनी का एक कर्मचारी और एक निजी व्यक्ति (कथित तौर पर सीएओ, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे का एक रिश्तेदार) शामिल है। इन सभी आरोपितों को रविवार, 17 जनवरी को गिरफ्तार किया गया है और ये एक मामले में एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मामले से जुड़े हैं, जिसकी जांच जारी है।
सीबीआई के अनुसार तलाशी के दौरान उप मुख्य अभियंता और सहायक कार्यकारी अभियंता (एईएन) के परिसरों से क्रमशः करीब 18.5 लाख रुपये, लगभग 6.5 लाख रुपये, देहरादून से 60 लाख रुपये और सीएओ के गुवाहाटी परिसर से करीब 54 लाख रुपये बरामद हुए हैं। इसके अलावा तलाशी में संपत्ति से संबंधित आभूषण और दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। नकदी कुल करीब 2.39 करोड़ रुपये बरामद हुई है, जिसमें एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत भी शामिल है। आरोपित आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर रहे थे। साथ ही आरोप है कि निजी कंपनी के निदेशक एनएफआर क्षेत्र में विभिन्न चालू परियोजनाओं में सीएओ के संपर्क में थे। यह भी आरोप है कि उनकी मांग पर उक्त निदेशक ने अपने कर्मचारी के माध्यम से देहरादून स्थित अपने आवास पर उक्त सीएओ के रिश्तेदार (निजी व्यक्ति) को एक करोड़ रुपये की रिश्वत दी। रिश्वत के पैसे का आदान-प्रदान करने वाले आरोपी सोमवार को पकड़े गए हैं।
सीबीआई प्रवक्ता आरके गौड़ा ने बताया कि यह एक बड़ा भ्रष्टाचार रैकेट था, जिसका भंडाफोड़ किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोप के मुताबिक पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के कुछ वरिष्ठ सार्वजनिक अधिकारी उत्तर पूर्वी सीमांत रेलवे में चल रही परियोजनाओं के लिए निजी ठेकेदारों के साथ भ्रष्ट व्यवहार में शामिल थे। ठेकेदारों को कथित रूप से बाद के बिलों के प्रसंस्करण के प्रसंस्करण, सार्वजनिक कार्यकारियों द्वारा अवैध संतुष्टि के एवज में भुगतान आदि जारी करने में सुविधा प्रदान की जा रही थी। आरोपितों से बयान लिया गया है। उसके आधार पर भी आगे की जांच की जा रही है।

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