आर्थिक संकट से जूझ रहे शिक्षक एवं कलाकार

  • पंडित हरिदत्त शर्मा
  • कोविड 19 के चलते आज पूरा देश आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इसी दौर में समाज का एक महत्वपूर्ण तथा अभिन्न अंग है प्राइवेट शिक्षक। शिक्षक, जो समाज में नए बीजों को पोषित करता है,जो समाज को बेहतर बनाने में अपना पूर्ण प्रयास करता है, जो अपने शिष्यों को हर मुसीबत से लडने की ताकत देता है, जो भविष्य का निर्माता है। आज मैं उसी शिक्षक की व्यथा और पीड़ा के विषय में बात करुंगा।
    एक प्राइवेट शिक्षक अपने जीवन के कई अमूल्य वर्ष जब किसी संस्थान को देता है तो वह आशा करता है कि वह संस्थान भी उसके साथ पूरा न्याय करेगा, उसके अथक परिश्रम और प्रयासों को सम्मान देगा, किन्तु ऐसा कभी नहीं हुआ। विशेषकर एक्टिविटी शिक्षक जो समाज को नए खिलाड़ी, गायक, वादक, नर्तक, चित्रकार, मूर्तिकार आदि असंख्य कलाकार प्रदान करते हैं। उन्हें तो विद्यालय प्रबंधन द्वारा शिक्षक की श्रेणी में भी नहीं रखा जाता। वर्तमान स्थिति तो और भी बदतर है। प्राइवेट शिक्षकों को नौकरी से निलंबित किया जा रहा है। ऐसे में उस शिक्षक तथा उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अवश्य ही विचारणीय है।
    दूसरी ओर समाज का कलाकार वर्ग है, जो प्रतिदिन अपनी कला की साधना करते हुए उस कला का प्रदर्शन कर के समाज को तनावमुक्त करता है, उसे भक्तिमय बनाता है, लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़ता है। साथ ही यह आशा करता है कि बदले में उसे उचित मानदेय प्राप्त होगा, किन्तु वर्तमान समय में परिस्थितिवश सांस्कृतिक, सामाजिक एवं व्यक्तिगत समारोह बंद कर दिए गए हैं, जिसके कारण कला जगत का संपूर्ण कार्य बंद हो चुका है। इन समारोहों के बंद होने से कोई एक नहीं बल्कि असंख्य व्यक्ति बेरोजगार हो गए हैं। उदाहरणार्थ विवाह समारोह बंद होने से बैंड बाजे वाले, खाना बनाने वाले कारीगर, फूलों की सजावट करने वाले, लाइट और साउंड की व्यवस्था करने वाले, टेंट वाले आदि अनेक लोगों का काम ठप हो गया है और आर्थिक तंगी के काले बादलों से उनके जीवन में घोर अंधकार छा गया है।
    मेरी राज्य सरकार तथा केन्द्र सरकार से यह अपील है कि उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए निम्नलखित प्रस्तावों पर अवश्य विचार करें-
    • कलाकारों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आरंभ करने हेतु कुछ दिशा निर्देशों के साथ अनुमति प्रदान की जाए।
    • प्राइवेट विद्यालय प्रबंधन द्वारा शिक्षकों को परमानेंट किया जाए।
    • नौकरी को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया जाए।
    • सभी एक्टिविटी शिक्षकों को अन्य शिक्षकों के बराबर अधिकार दिए जाएं।
    • जिन शिक्षकों को नौकरी से निलंबित किया गया है, उन्हें वापस नौकरी पर रखा जाए।
    • कुछ सहायक एन जी ओ को भी इस कार्य में जोड़ा जाए।
    • समाज का संपन्न वर्ग सहायता करने हेतु आगे बढ़े।
    • शिक्षकों एवं कलाकारों की अधिकतम आर्थिक सहायता कैसे हो, इस बात पर विशेष रूप से विचार किया जाए।
    अंत में मैं उन अभिभावकों से विनम्र निवेदन करता हूं कि यदि ईश्वर की कृपा से आप संपन्न हैं और आपको कोई आर्थिक तंगी नहीं है तो कृपया मानवीय भाव रखते हुए अपने बच्चों की फीस समय पर जमा करें।
    आपके द्वारा दी गई फीस से ही विद्यालय के शिक्षक तथा अन्य कर्मचारी अपना वेतन पाते हैं। मुझे पूर्ण आशा और विश्वास है कि मेरी बात आपके मन- मस्तिष्क तक अवश्य पहुंचेगी।
    (लेखक उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ के सदस्य हैं।)

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