प्रीतिका बच्चन
शिमला। प्रदेश के मुख्यमंत्री का दावा है कि शिक्षा के क्षेत्र में यह राज्य अग्रणी है, लेकिन ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ टीम ने एक सच और खोल निकाला है। हिमाचल प्रदेश के 312 सरकारी स्कूलों में बिजली का इंतजाम नहीं है। जबकि शिक्षा विभाग भी सर्वशिक्षा अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च करके बड़े-बड़े दावे करता है। उसके दावे की अब धज्जियां उड़ रही हैं। यहां तक कि इन सैकड़ों सरकारी मिडल स्कूलों में बिजली कनेक्शन तक नहीं करवाया गया है।
मौजूदा समय में प्रदेश में 2200 के करीब मिडल स्कूल हैं। यानी 13 फीसदी स्कूल बिना बिजली के चल रहे हैं। विद्युत उत्पादक राज्य हिमाचल के लिए ये आंकड़े निश्चित ही चौंकाने वाले हैं। दरअसल, सर्वशिक्षा अभियान की ओर से स्कूलों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ करने के लिए बजट सालाना मिलता है। फिर भी शिक्षा विभाग इन स्कूलों में बिजली की व्यवस्था नहीं कर पाया। सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का मोहभंग होने की यह भी एक वजह हो सकती है।
शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने भी बुधवार को माना कि प्रदेश की 312 माध्यमिक पाठशालाएं बिजली से वंचित हैं। उन्होंने बताया कि इन स्कूलों में सौर ऊर्जा पैनल स्थापित करने के लिए हिमऊर्जा विभाग को 11.23 करोड़ की राशि जारी की गई है। हिम ऊर्जा विभाग द्वारा 104 पाठशालाओं में सौर ऊर्जा पैनल स्थापित कर दिए गए हैं। जबकि 183 पाठशालाओं में सौर ऊर्जा पैनल का सामान पहुंचा दिया गया है। शेष पाठशालाओं में 30 सितम्बर 2020 तक सौर ऊर्जा पैनल स्थापित करने का लक्ष्य है।


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