जितेन्द्र बच्चन / राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो चीफ
गाजियाबाद। गाजियाबाद का नाम बदलकर महाराजा अग्रसेन नगर रखने के लिए मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अपील करने वाले महाराजा अग्रसेन नगर नाम परिवर्तन संघर्ष समिति गाजियाबाद के अध्यक्ष रूपचन्द नागर अपनी इस मांग को तर्क संगत और न्यायोचित बताते हैं। उन्होंने सोमवार को नवयुग मार्केट में एक प्रेस वार्ता कर पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी एक ज्ञापन भेजकर उन्होंने मांग की है कि गाजियाबाद का नाम बदलकर महाराजा अग्रसेन नगर रखा जाए।
श्री नागर ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया कि नाम परिवर्तन के लिए माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में जो याचिका दायर की गई है, उसकी वाद संख्या 269/2024 है। उन्होंने हाई कोर्ट से अपील की है कि जनपद का नाम महाराजा अग्रेसन नगर रखा जाए। उनकी यह मांग तर्कसंगत और न्यायोचित है, इसके लिए श्री नागर ने तमाम ऐतिहासिक पुस्तकों को खंगाला है और उसे दस्तावेज के तौर पर न्यायालय में प्रस्तुत किया है।
उच्च न्यायालय में रख सकते हैं अपना पक्ष:
उल्लेखनीय है कि रूपचन्द नागर ‘पर्यावरण पुरुष’ के नाम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विख्यात हैं। उनकी गिनती गाजियाबाद जिले के वरिष्ठ समाजसेवियों में होती है। गुर्जर, जाट, यादव (गजय) संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। देश की अग्रणी एवं प्रतिष्ठित संस्था ‘समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने पिछले महीने 21 जनवरी को श्री नागर को राष्ट्र के विकास में विशिष्ट योगदान के लिए ‘राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान’ से नवाजा था। इसके अलावा उन्हें और भी कई पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हैं। श्री नागर ने जनमानस से अपील करते हुए कहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में जो अपील दायर की गई है, उसमें कोई भी चाहे तो पार्टी बनकर अपनी बात उच्च न्यायालय के सामने रख सकता है।
अध्यात्मिक और एतिहासिक तर्क :
रूपचन्द नागर ने हाई कोर्ट में गाजियाबाद जिले का नाम बदलने को लेकर अपना एक मजबूत तर्क प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया है कि समस्त भारतीयों के पूर्वज आदिकाल में ऋषि-महर्षि और ब्रह्मर्षि रहे हैं। उन ऋषियों के वंशज ही आज के युग में अपनी-अपनी ऋषि परम्परा को आगे बढ़ाते आ रहे हैं। जैसे महर्षि परशुराम के वंशज ब्राह्मण, त्यागी ज्ञानवर्धन का कार्य, महर्षि विश्वकर्मा के वंशज शिल्पकारी के कार्य, महाराजा यदु के यदुवंशी वंशज गुर्जर, जाट, यादव (गजय) आदि कृषि व दूध उत्पादन के कार्य, महाराजा शूरसेन के वंशज पाल, मौर्य, शाक्य, सैनी आदि बागवानी खेती के कार्य तथा श्रंगऋषि के वंशज कटिहाल, सचान, पटेल, गंगवार आदि खेतीहर कार्य आदि अपनी परम्परा के अनुसार करते हुए देश-धर्म की रक्षा कर रहे हैं।
महाराजा अग्रसेन को वैश्य समाज का बताया पूर्वज:
श्री नागर का मानना है कि उपरोक्त सभी कार्यों में अर्थ का विशेष महत्व होता है। जिसे केवल अग्रवाल (वैश्य) समाज व्यापार करते हुए अकेला ही पूरा कर रहा है। दिल्ली तथा गाजियाबाद में अग्रवाल समाज की विशेष आबादी निवास करती है। महाराजा अग्रसेन अग्रवाल (वैश्य) समाज के पूर्वज हैं। ऐसे में गाजियाबाद का नाम बदलकर महाराजा अग्रसेन नगर रखना न्यायोचित ही नहीं बल्कि तर्कसंगत भी होगा।
आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजी प्रतियां:
उन्होंने 19 फरवरी 2024 को प्रेस वार्ता में हाई कोर्ट इलाहाबाद में दाखिल की गई याचिका की प्रति रखते हुए बताया कि इससे जुड़ा मांग पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भेजा गया है। साथ ही आवश्यक कार्यवाही के लिए उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, मुख्य सचिव, राजस्व मंत्रालय के मुख्य सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव, जिलाधिकारी गाजियाबाद, पुलिस कमिश्नर, मेयर नगर निगम, नगर आयुक्त श्रीमती सुनीता दयाल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, सांसद डॉ वीके सिंह, राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल और विधायक अतुल गर्ग को भी मांग पत्र की प्रति भेजकर जिले का नाम बदलकर अग्रसेन नगर करने की अपील की है।
नागर का वैश्य समाज ने किया अभिनंदन:
श्री नागर ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि वह वर्षों से समाज को विकसित करने का कार्य करते आ रहे हैं। जिले का नाम बदलने का उनका उद्देश्य भी यही है कि महाराजा अग्रेसन नगर के नाम से यह जनपद पूरी दुनिया में जाना-पहचाना जाए। प्रेस वार्ता में वैश्य समाज के कुछ प्रतिष्ठित लोगों ने इस पुख्ता मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए रूपचन्द नागर का अभिनंदन किया है। इस अवसर पर नरेश पाल सिंह, रामदास त्यागी, सविता रानी सुरेश अग्रवाल, वीके गुप्ता, जगत सिंह नागर और सचित खारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।


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