राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
मुजफ्फरपुर। जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा नया टोला स्थित थियोसोफिकल लाज में कलम के जादूगर रामवृक्ष बेनीपुरी की 125वीं जयंती के अवसर पर एक व्याख्यान माला सम्मेलन का आयोजन किया गया। संस्था के जिला अध्यक्ष चित्तरंजन सिन्हा कनक ने अध्यक्षता की। वरिष्ठ साहित्यकार एवं जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री उदय नारायण सिंह ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बेनीपुरी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने उन्हें साहित्याकाश का सूर्य बताया।
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में उदय नारायण ने कहा कि बेनीपुरी के साहित्य में माटी की सुंगध है। उनका कहानी संग्रह -“माटी की मूरतें” इस कथ्य का जीत जागता प्रमाण है। हिंदी एवं बज्जिका के मूर्धन्य कवि/साहित्यकार डॉ शारदाचरण ने कहा कि बेनीपुरी जी जन संवेदना के साहित्यकार थे। अध्यक्षीय उद्बोधन में चित्तरंजन सिन्हा कनक ने कहा कि बेनीपुरी का दिल मुजफ्फरपुर में बसता था। मुजफ्फरपुर से उनका आत्मीय संबंध था। वे जब यहां रहते थे तो दाता कंवल साह के मजार पर जरूर जाते थे। वे नेक दिल और उदार व्यक्तित्व के महान साहित्यकार थे।
डॉ विनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि बेनीपुरी जी के साहित्य में संवेदना और करुणा प्रमुखता से मुखर हुआ है। मधु मंगल ठाकुर ने कहा कि बेनीपुरी जी हमारे बीच के थे। हम हीं नहीं पुरा मुजफ्फरपुर उनका ऋणी है। पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र ने कहा कि बेनीपुरी से मुजफ्फरपुर कभी उऋण नहीं होगा। प्रेम कुमार वर्मा ने कहा बेनीपुरी जी आजके साहित्यकार के प्रेरणा स्त्रोत हैं। साहित्य मंत्री देवेन्द्र कुमार ने कहा कि बेनीपुरी जी की कृतियां अनुकरणीय है।
वित्त मंत्री उत्तम कुमार और प्रचार मंत्री गणेश प्रसाद सिंह ने कहा कि बेनीपुरी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम लोग भी राग -द्वेष से ऊपर उठकर साहित्य का सृजन करें। डॉ हरि किशोर प्रसाद सिंह ने कहा कि बेनीपुरी जी ने देश का नाम रोशन किया। डॉ बी के मल्लिक ने बेनीपुरी को साहित्य जगत की आन-बान और शान बताया। संगीता सिन्हा, उमानाथ सिंह एवं अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए। मीडिया प्रभारी रमेश प्रसाद श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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