राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
मुजफ्फरपुर। निराला निकेतन मेँ महाकवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के प्रतिमास्थल पर मासिक महावाणी स्मरणीय सह काव्य गोष्ठी सह होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ गीतकार अँजनी कुमार पाठक ने आचार्य श्री के गीत “रेत पर जो लिख रहा मैं, धार उसको मेट देगी…” गाकर किया। वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी का आगाज हुआ। गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता दीनबंधु आजाद ने किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता रामवृक्ष चकपुरी ने अपनी रचना- “लोग यहां वर्फ के ढेर से खतरे मोल लिया करते हैं…।” पर खूब प्रसंशा बटोरी। सत्येंद्र कुमार सत्येन ने-“झूम झूम के जियरा गावेअईहे फागुन मेँ पिया हमार…।” दीनबंधु आजाद ने-“ईश्वर का दिया कभी अल्प नहीं होता, श्रवण कुमार ने- “आशा के दीप हरदम मन मेँ जलाये रखना…।” प्रमोद नारायण मिश्र ने- “तेरे नफरत के नश्तर को सह लेगें हम…।” आलोक कुमार अभिषेक ने- “बड़े मजे का है त्योहार होली रँगोँ की बछौर है…।” ने भी खूब तालियां बटोरी।
वरिष्ठ गीतकार अँजनी कुमार पाठक ने- “होली मेँ खूब जमा है रँग, “उमेश राज ने- चटक रँग टेसू सुमन मुस्काई”, डाँ हरि किशोर सिंह ने- “जय बज्जिका…”, अरुण कुमार तुलसी ने- “नारी तुम ही जीवन का राज है”, अशोक भारती ने- “धूप पर जब भी लिखोगे बात हकीकत की होगी, वरिष्ठ कवयित्री लता सिन्हा ज्योतिर्मय ने- “है कैलाश सखी शिव की नगरी…” जगदीश शर्मा ने- ‘पापी पेट भूखा उठता रोज एक ही सवाल है…।” सुनाकर वाहवाही लूटी एवं तालियां हर काव्यगीत पर बजती रही। कार्यक्रम का समापन नागरिक मोर्चा के संस्थापक महासचिव मोहन सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। साथ ही सभी को होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गयी।

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