जितेन्द्र बच्चन
गाजियाबाद। शहर हो या देहात, जिले में कई ऐसे नर्सिंग होम धड़ल्ले से चल रहे हैं जो किसी भी मानक का पालन नहीं करते। इन दवाखानों में जो डॉक्टर और नर्स बैठते हैं, उनके पास कोई डिग्री नहीं है और न ही नर्स प्रशिक्षित है। कुछेक जगह तो एक-दो कमरों में नर्सिंग होम सिमटे हुए हैं। इसके बावजूद वहां इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को भर्ती कर लिया जाता है और ऑपरेशन करने तक का दावा किया जाता है। इलाज के नाम पर मरीजों का दोहन किया जाता है। कई बार तो जान पर बन आती है, तब भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार लापरवाह बने हुए हैं।
बताया जाता है कि जिला अस्पताल में कुछ महिला दलाल भी सक्रिय हैं, जो मरीजों को फंसाकर निजी नर्सिंग होम में भेजती हैं। वे कहती हैं, यहां धक्के खाने से अच्छा है कि कम पैसे में बेहतर इलाज कराओ। ये दलाल मरीजों के तिमारदारों को भी किसी न किसी तरह घटिया नर्सिंगहोमों में इलाज के लिए तैयार कर लेती हैं। बाद में मरीज को पता चलता है कि वह तो फंस गया। मानक विहीन नर्सिंग होम है, अनट्रेंड चिकित्सक हैं और दवा के नाम पर उनसे मोटी रकम वूसल की गई है, तो वे अपना सिर धुन लेते हैं।
शहर में एक-दो छोटे-मोटे अस्पताल ऐसे भी हैं, जिनके संचालक हाई स्कूल फेल हैं या फिर कुछ फर्जी डिग्रीधारी चिकित्सकों के भरोसे उनकी दुकान चल रही है। इन लोगों की अधिकारियों से साठगांठ है- ‘तुम भी खाओं और हमें भी खाने दो!’ इस तरह के अस्पतालों में कई बार प्रसूति के दौरान गर्भवती की मौत हो चुकी है या बच्चा खत्म हो गया। दर्जन भर से अधिक ऐसे झोलाछाप डॉक्टर भी हैं जो मरीजों को खुलेआम लूट रहे हैं, उनके जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कुद नहीं करते। आखिर इन फर्जी डॉक्टरों, मानक विहीन अस्पतालों और नर्सिंगहोमों के खिलाफ कब स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटेगी?

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