ऑल इण्डिया कायस्थ काउंसिल ने परी श्रीवास्तव के परिजनों से की मुलाकात, 8 आरोपी गिरफ्तार

बस्ती से रितेश श्रीवास्तव / राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
बस्ती। पुलिस की मौजूदगी में 14 वर्षीया छात्रा परी श्रीवास्तव की हत्या से पूरा जिला दहल उठा है। जमीनी विवाद में हुई इस लोमहर्षक घटना के बाद आम लोग कांप उठे हैं। देश के कायस्थों में आक्रोश है। कई कायस्थ नेताओं व विपक्ष द्वारा इस मामले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाने के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है। आखिरकार डीआईजी संजीव त्यागी के निर्देश पर बस्ती के एसपी अभिनंदन ने पैकोलिया थाना प्रभारी धर्मेंद्र यादव सहित दो और पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया। अब तक 11 आरोपियों में से आठ को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन पीड़ित इतने से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि लापरवाह पुलिसकर्मियों को बर्खास्त किया जाए और दोषियों को फांसी की सजा मिले।
घटना 15 जून की है। पैकोलिया थाना क्षेत्र के जीतीपुर गांव के निवासी आलोक श्रीवास्तव की बेटी 12वीं की छात्रा परी श्रीवास्तव की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गयी। मामला जमीनी विवाद का था। लेखपाल, कानूनगो और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों के अलावा पुलिस भी मौके पर मौजूद थी। पैमाइश के पश्चात जो जमीन आलोक श्रीवास्तव को निशानदेही कर बताई गई, उससे दूसरे पक्ष के लोग नाराज हो उठे। उन्होंने आलोक के परिवार पर कातिलाना हमला कर दिया। आलोक, उनकी पत्नी और मां गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद बेटी परी की चाकू से गोद कर हत्या कर दी गई।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रंजन के नेतृत्व में 13 सदस्यीय डेलिगेशन पीड़ित परिवार से मिला। जिसमें विधायक महेंद्र नाथ यादव, राजेंद्र चौधरी, कवींद्र चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। सभी लोग जीतीपुर के लाला पुरवा गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की। साथ ही सपा ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
कायस्थों के कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की है। गोरखपुर आदि जिलों में इस घटना को लेकर कायस्थ संगठनों व संस्थाओं ने प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन जारी किया है। इसी कड़ी में शनिवार, 28 जून को ऑल इण्डिया कायस्थ काउंसिल के सदस्य रितेश श्रीवास्तव ने लाला पुरवा पहुंचे। उन्होंने परी के परिजनों से मुलाकात करने के बाद गिरफ्तार आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की मांग की है। रासुका लगनी भी चाहिए। ऐसे जघन्य अपराध करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई और इस तरह की घटना न कर सके।


रितेश श्रीवास्तव ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस को जमीनी विवाद की जानकारी थी। अगर समय पर कार्रवाई की होती तो परी की जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों का निलंबित करने से कुछ नहीं होगा। इस मामले में प्रशासन को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। श्रीवास्तव ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया है कि ऑल इण्डिया कायस्थ काउंसिल उनके साथ है। परी श्रीवास्तव के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव मदद की जाएगी।
शनिवार, 28 जून को पुलिस अधीक्षक बस्ती अभिनंदन ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को बताया कि अतुल श्रीवास्तव के भांजे अंशु की तहरीर पर 11 नामजद लोगों को इस मामले में नामजद किया गया है। इनमें से पांच लोगों अमरनाथ वर्मा, दूधनाथ वर्मा, राजेंद्र वर्मा, कुसुम वर्मा, फूल कुमारी वर्मा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। एक दिन पहले तीन और आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। शेष तीन अरोपी इस मामले के अभी फरार हैं, जिनकी पुलिस तेजी से तलाश कर रही है।
इस बीच अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप नारायण और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मयंक श्रीवास्तव ने विधान परिषद सभापति कुँवर मानवेंद्र सिंह और वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण कुमार सक्सेना को ज्ञापन सौंपा है। इससे पहले शुक्रवार, 27 जून को प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद से मुलाकार कर न्यायोचित कार्यवाही की मांग की थी। कायस्थ संगठनों ने पीड़ित परिवार के लिए सरकार से एक करोड़ की आर्थिक सहायता देने की भी मांग की है।

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