मुकेश गुप्ता / राष्ट्रीय जनमोर्चा
– राहत की जगह बढ़ी दिक्कत, कई महीनों से नहीं आए बिल
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर ऊर्जा निगम द्वारा प्रदेश भर में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ये तो जी का जंजाल बन चुके हैं। खासकर गाजियाबाद के उपभोक्ता बहुत परेशान हैं। यहां विद्युत विभाग के अधिकारियों की साठगांठ से जिस खंड अधिकारी के क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगे हैं, वहां 6-7 महीने के बाद भी बिल नहीं आए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आखिर कौन है इसका जिम्मेदार?
विजयनगर, प्रताप विहार और सिद्धार्थ विहार के बिजली उपभोक्ताओं का कहना है कि अगर देर-सवेर एकमुश्त बिजली का बिल आया तो वे कैसे भर पाएंगे? उधर मीटर लगाने वाली कम्पनी के कर्मचारियों की तानाशाही इस कदर बढ़ी हुई है कि वे जहां मन करता है, वहीं मीटर लगा देते हैं। उपभोक्ताओं का अनुरोध कतई नहीं मानते। सिद्धार्थ विहार में बनी ईडब्ल्यूएस, एलआईजी फलैटों में एक-एक ब्लॉक में 16 फलैट हैं। उनमे कर्मचारियों ने केवल 6 मीटर लगा दिए, बाकी 10 फलैटों में नहीं लगाए।
उपभोक्तओं का कहना है कि जिन लोगों के स्मार्ट मीटर लगे हैं, उनके करीब छह महीने से बिजली बिल नहीं आए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि हम लोग एकमुश्त बिल कैसे भरेंगे। गरीब की मसीहा सरकार के राज्य में गरीब परिवार बिजली विभाग का उत्पीडन झेल रहा है।
अधिकारी की साठगांठ से हो रही बिजली चोरी :
प्रताप विहार और सिद्धार्थ विहार में बिजली अधिकारियों की साठगांठ से बिजली चोरी हो रही है। यहां क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटों के खम्बों से रात्रि में बिजली अधिकारी स्वयं कबाड़ी, ठेलों पटरी व आवासीय योजना में दुकानें खुलवाकर बिजली चोरी करवा रहे हैं। इन सारी बातों से उपखंड अधिकारी, जेई, लाइनमैन सभी अवगत हैं पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसका मतलब पूरी साठगांठ है!
दलालों का खेल जारी है:
बिलिंग क्लर्क और मीटर रीडर की साठगांठ से लोड बढ़ाकर भरी सर्दियों गर्मियों में हजारों रपये के बिल भेज दिए गए। लोग बिल ठीक कराने के लिए जब बिजली घर के चक्कर लगाते हैं तो उसे धमकाकर भगा दिया जाता है। उसके बाद पीडी कराने पर जोर दिया जाता है। और तो और, सौ-पाचं सौ के स्टांप एग्रीमेंट पर बिजली के कनेक्शन देने का खेल जारी है। यह दलालों की साठगांठ से कर्मचारी कर रहे हैं, जबकि कोई व्यक्ति कनेक्शन लेना चाहे तो उसे मकान की रजिस्ट्री के बिना कनेक्शन नहीं दिया जाता। आखिर कब बंद होगा इस तरह का भ्रष्टाचार?


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