राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। कवि नगर स्थित जानकी सभागार में अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान द्वारा नवगीत पर विचार गोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ नवगीतकार डॉ. सुभाष वसिष्ठ ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रसिद्ध आलोचक वेद शर्मा वेद तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में युवा नवगीतकार राहुल शिवाय मंच पर विशेष रूप से उपस्थित रहे। वेद शर्मा ने कहा, “समकालीन आलोचकों ने नवगीत को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका वह हकदार रहा है।”
कार्यक्रम को दो सत्रों में हुआ। प्रथम सत्र का केंद्रबिंदु नवगीत रहा, जिसमें गीत काव्य की इस विशिष्ट विधा के उद्भव एवं विकास और सामाजिक, सांस्कृतिक और सृजनात्मक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। सुभाष वसिष्ठ ने कहा कि नवगीत केवल छंद का अनुशासन नहीं बल्कि बदलते समय की संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज है, जो आम जनमानस के सुख-दुख, संघर्ष और आशाओं को प्रभावी रूप से अभिव्यक्त करता है।
द्वितीय सत्र में माहौल पूरी तरह काव्यमय हो गया। इस सत्र में प्रतिभागियों ने अपने गीत, कविताएँ और ग़ज़लें प्रस्तुत कीं। श्रोताओं ने सभी प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष, प्रख्यात नवगीतकार एवं पत्रकार डॉ. धनंजय सिंह की विशेष उपस्थिति ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। उन्होंने साहित्य की बदलती प्रवृत्तियों और नवगीत की बढ़ती लोकप्रियता पर अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए।
मंच संचालन संस्थान के महासचिव प्रवीण कुमार ने संयमित और प्रभावी शैली में किया, जिससे दोनों सत्र सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुए। इस अवसर पर बीके वर्मा ‘शैदी’, मासूम गाजियाबादी, कुमार सुबोध, सोमदत्त शर्मा, अनिमेष शर्मा, श्रीविलास सिंह, संजय शुक्ल, सय्यद अली मेहदी, अमरेंद्र कुमार राय, रजनी सिंह, स्नेह लता, अंजू शर्मा, आकाश शर्मा, संदीप चौधरी, धीरेंद्र त्रिपाठी, इंद्रजीत सुकुमार मासूम, बृजेश सिंह, अजय वीर त्यागी, सरोज त्यागी, ममता सिंह, रवि कुमार, सरिता विजय शर्मा, सुखबीर जैन, डॉ तारा गुप्ता, अभिषेक कौशिक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


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