डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर उमड़ा आस्था का सैलाब

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
छपरा। देश के प्रथम राष्ट्रपति, भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 141वीं जयंती बुधवार को छपरा के नगरपालिका चौक पर अभूतपूर्व गरिमा और श्रद्धा के साथ मनाई गई। राजेंद्र स्मारक ट्रस्ट, छपरा और जिला प्रशासन सारण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने न केवल एक महान नेता को श्रद्धांजलि दी, बल्कि उनकी अद्वितीय कार्यशैली और नेतृत्व के मूल्यों को भी पुनर्जीवित किया। बुधवार को नगर के मध्य स्थित राजेंद्र बाबू की आदमकद प्रतिमा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का तांता लगा रहा, जो राष्ट्रपिता समान इस महान व्यक्तित्व के प्रति जनमानस की अटूट आस्था को दर्शाता है।

प्रशासनिक सेवा का मूल मार्गदर्शन नमन एवं माल्यार्पण

माल्यार्पण कार्यक्रम का शुभारंभ सारण जिलाधिकारी अमन समीर ने किया। उनके साथ एडीएम मुकेश कुमार, एसडीओ नितेश कुमार, नगर आयुक्त सुनील कुमार पांडेय सहित अन्य अधिकारियों ने भी पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। यह उपस्थित जनसमूह और अधिकारियों की भागीदारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उस ‘प्रशासनिक आचार संहिता’ को दर्शाती है, जिसे उन्होंने देश की सेवा के लिए स्थापित किया था।
ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. कामेश्वर प्रसाद सिंह ने ट्रस्ट भवन पर झंडोत्तोलन कर औपचारिक रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जिलाधिकारी अमन समीर ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जीवनी को भारतीय राजनीति, प्रशासन, नैतिकता और सरलता का प्रतीक बताते हुए कहा कि राजेंद्र बाबू का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। उनके आदर्श आज भी प्रशासनिक सेवा का मूल मार्गदर्शन हैं। डीएम ने अपने संबोधन में कहा कि यह कथन स्पष्ट करता है कि राजेंद्र बाबू का ‘मॉडल ऑफ गवर्नेंस’ आज भी भारत की सिविल सेवाओं के लिए एक ‘फाउंडेशन कोड’ का कार्य करता है, जिसमें सत्यनिष्ठा, विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा केंद्रीय मूल्य हैं।
ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. कामेश्वर प्रसाद सिंह ने इस अवसर पर राष्ट्रकवि सरोजिनी नायडू के मशहूर कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि “यदि सोने की कलम और मधु की स्याही हो, तभी राजेंद्र बाबू की गाथा लिखी जा सकती है।”
यह उद्धरण राजेंद्र बाबू की जीवन की असामान्य सादगी और अद्वितीय नैतिक शक्ति को कोड करता है। उन्होंने राजेंद्र बाबू को सादगी, सदाचार और न्यायप्रियता की प्रतिमूर्ति बताया, जिनकी जीवनशैली आज भी समाज के लिए अनुकरणीय है। उनकी कार्यशैली किसी भी ‘इकोनॉमी ऑफ स्केल’ से परे थी, जहाँ उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को राष्ट्रसेवा के लिए गौण रखा। यह एक ऐसा ‘एथिकल आर्किटेक्चर’ था जो आज के नेताओं के लिए एक चुनौती और प्रेरणा है।
जयंती समारोह में पूर्व मंत्री उदित राय, वैद्यनाथ प्रसाद सिंह विकल, ट्रस्ट के महासचिव शिवजी सिंह, सचिव मनोज कुमार सिंह (अधिवक्ता) सहित विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो उनकी व्यापक स्वीकार्यता और ‘सर्व-समावेशी नेतृत्व’ का प्रमाण है।

युवा पीढ़ी के लिए ‘लीडरशिप एल्गोरिथम’ और ‘फाउंडेशन कोड

जयंती समारोह को वक्ताओं ने केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि ‘राजेंद्र प्रसाद मॉडल ऑफ लीडरशिप’ को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प दिवस बताया। वक्ताओं ने उनकी कार्यशैली के मर्म को तकनीकी और दार्शनिक शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राजेंद्र बाबू की सत्यनिष्ठा प्रशासनिक सेवा के लिए आज भी प्रासंगिक है। यह उनकी न्यायिक और राजनीतिक निर्णयों में सत्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जहाँ उन्होंने हर परिस्थिति में ‘ईमानदारी का कोड’ बनाए रखा। डॉ राजेंद्र प्रसाद का त्याग, विनम्रता और राष्ट्रसेवा भारतीय लोकतंत्र का फाउंडेशन कोड है। यह कोड बताता है कि लोकतंत्र का आधार केवल संवैधानिक प्रावधान नहीं, बल्कि नेताओं का नैतिक चरित्र भी है।

कर्तव्यनिष्ठा का संदेश

युवा पीढ़ी को उनकी जीवनी से साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश मिलता है। यह एक जीवनशैली का संदेश है, जिसमें व्यक्तिगत लाभ से ऊपर राष्ट्र का हित सर्वोपरि होता है। सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक संकल्प लिया कि उनके जीवन मूल्यों-साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों के बीच निरंतर प्रसारित किया जाएगा, ताकि यह नैतिकता का कोड आने वाली पीढ़ियों के ‘ऑपरेटिंग सिस्टम’ का हिस्सा बन सके।

चित्रांश समिति व अन्य संगठनों ने जयंती पर किया याद

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर चित्रांश समिति, समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया और कायस्थ परिवार छपरा जैसे अन्य संगठनों ने भी अपने-अपने स्तर पर देश रतन डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की जयंती- श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए, जो इस महान राष्ट्रनिर्माता के प्रति सच्ची सामाजिक एकजुटता को प्रदर्शित करता है। कार्यक्रम गरिमापूर्ण, शांतिपूर्ण और प्रेरणादायी माहौल में सम्पन्न हुआ, जिसके सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन एवं ट्रस्ट ने उत्कृष्ट समन्वय स्थापित किया।

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