आध्यात्मिकता से समाज में आएगा सकारात्मक बदलाव : नानक दास

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
पटौदी। गुरुग्राम (हरियाणा) के बिलासपुर स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में ब्रह्माकुमारीज का तीन दिवसीय अखिल भारतीय साधु-संत महासम्मेलन का समापन हो गया। इसमें देशभर से आए संत, महात्मा और आध्यात्मिक गुरु शामिल हुए। बड़ी खाटू नागौर राजस्थान से आए अखिल भारतीय कबीर मठ सतगुरु कबीर आश्रम सेवा संस्थान के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत (डॉ.) नानक दास महाराज ने इस मौके पर कहा कि असली सुख आध्यात्मिक जीवन में ही मिलता है और इससे समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।
उन्होंने राष्ट्रहित में संदेश देते हुए गोस्वामी तुलसीदास की एक पंक्ति को उद्धित किया, “तुलसी दया न छोड़िए जब लग घट में प्राण।“ और कहा कि आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए खान-पान, रहन-सहन, आहार-विहार, शुद्ध सात्विक विचार और सकारात्मक सोच रखें। ध्यान सुमिरन से मन पवित्र कर सकते हैं। आडम्बर पाखंड छोड़कर पवित्रता और सकारात्मक सोच से ही नये विश्व का निर्माण कर सकते हैं।
महंत नानक दास जी ने युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए बताया कि ओम शांति संगठन का सबसे बड़ा योगदान सत्य सनातन धर्म संस्कृति में रहा है, जिसने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। विश्वास,पवित्रता, शांति और वैराग्य के साथ आत्मज्ञान के माध्यम से संपूर्ण मानव जगत को सभ्यता संस्कृति से जोड़कर आत्मबोध कराने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कामवासना को त्याग कर वैराग्य और भक्ति मार्ग में अपने जीवन को पवित्र बनाना चाहिए। सकारात्मक सोच से ही समाज की व्यवस्था अच्छी हो सकती है।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी ईश्वर विश्वविद्यालय में जुड़े पिछले 10 साल से गृहस्थ जीवन में रहते हुए वानप्रस्थ जीवन शैली को अपनाकर त्याग, तपस्या, ब्रह्मचर्य जीवन में चल रहे 200 युगल परिवारों का धर्म मंच द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर धार्मिक प्रभाग के मुख्य बीके नारायण भाई, बीके सपना दीदी, गुरुग्राम ओम शांति रिट्रीट सेंटर मानेसर हरियाणा की अध्यक्ष राजयोगी आशा दीदी, राजयोगी उषा दीदी, प्रयागराज से मनोरमा दीदी, नवापारा रायपुर से राजयोगी पुष्पा दीदी सहित सैकड़ों बीके भाई-बहन उपस्थित रहे। साथ ही गौ ऋषि महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान स्वरूपानंद, अक्रियजी महाराज जोधपुर, महामंडलेश्वर प्रेमानंद गिरी जी महाराज मुंबई महाराष्ट्र, महामंडलेश्वर शिव स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज जोधपुर सहीत और भी कई वरिष्ठ संतों की उपस्थिति बनी रही।

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