डॉ कमलेश भारद्वाज
गाजियाबाद। शंभू दयाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरुवार को संस्कृति समिति एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त प्रयास से स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में सरस्वती विद्या मंदिर नेहरू नगर के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य राम बाबू पाठक ने मां सरस्वती एवं बाबू शंभू दयाल की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया।
राम बाबू ने स्वामी विवेकानंद के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महान दार्शनिक स्वामी विवेकानंद का जन्म 1863 में कलकत्ता में हुआ था। स्वामी विवेकानंद का वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने न सिर्फ भारत के उत्थान के लिए काम किया बल्कि लोगों को जीवन जीने की कला भी सिखाई। स्वामी विवेकानंद का जीवन बड़ा ही संघर्षमयी था। मात्र 25 साल की उम्र में अपने गुरु से प्रेरित होकर उन्होंने सांसारिक मोह-माया त्याग दी और संन्यासी बन गए। स्वामी विवेकानंद जीवन भर संन्यासी रहे और आखिरी सांस तक वह समाज की भलाई के लिए काम करते रहे। स्वामी विवेकानंद की कही बातें दुनिया भर के लोगों को प्रेरणा देती हैं। उनके विचार आपके जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं। महाविद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ मंजू गोयल ने कहा कि विवेकानंद जैसी महान आत्माएं संसार में बार-बार जन्म नहीं लेती। अत: उनके विचारों को हमें अपने जीवन में सदैव ढालने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम के आयोजन में सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष डा विन्दु करण वालों एवं एनएसएस प्रभारी डॉ नीलम गर्ग द्वारा विचारों का सुनकर सभागार में उपस्थित सभी शिक्षक गण एवं छात्र-छात्राओं ने लाभ उठाया। विचार गोष्ठी के अलावा कार्यक्रम का आकर्षण का मुख्य केन्द्र विन्दु था छात्रों के द्वारा किए गए विभिन्न कार्यक्रम। इस अवसर पर सभी छात्र-छात्राओं को उनके द्वरा किए गए कार्यों के लिए सर्टिफेकेट दिए गए। इससे विद्यार्थी बहुत खुश हुए। इस अवसर पर अनिल चौहान, डॉ वीएस राय, डॉ राज नारायण शुक्ला, डॉ अजय उपाध्याय, डॉ अखिलोश मिश्रा, डॉ नीरजा सिंह, निहारिका गर्ग, नविता शर्मा, गरिमा बंसल, रितेश चौधरी आदि उपस्थित रहे।


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