राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। नाक-कान गला विशेषज्ञ डॉ. बीपी त्यागी ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि कैन्सर एक घातक बीमारी है। शराब, सिगरेट और तंबाकू से अलग आज का खान-पीन और मिलावट के कारण कैन्सर के चांसेज बढ़ रहे हैं। मोटापा कैन्सर का सबसे बड़ा कारण है। ऐसिड बनना भी कैन्सर का कारण है। फ़्राइड फ़ूड, फ़ास्ट फ़ूड से ऐसिड बनता है और वह ऐसिड गले मैं आता है। इस बीमारी को एलपीआरडी कहते हैं। यह गले के कैन्सर का कारण है। हम अगर इन सब चीजों से बचाव करें तो पूरी दुनिया में 40 फीसदी और भारत में 70 फीसदी मरीजों को कैंसर से बचा सकते हैं।
डॉक्टर ब्रजपाल त्यागी मंगलवार को विश्व कैन्सर दिवस पर हर्ष ईएनटी अस्पताल में मरीज़ों को कैन्सर से बचने के उपाय बता रहे थे। उन्होंने बताया कि वह अस्पताल में रोजाना 50 से अधिक नाक, कान और गले के मरीजों को देखते हैं। अगर तीसरी स्टेज से पहले मरीज उनके पास आ जाता है तो कैन्सर का इलाज संभव है।
उन्होंने कहाक वोवेल्स (aeiou) को जपकर कैन्सर से बचा जा सकता है। यह हमारे पैरसिम्पथेटिक सिस्टम को जागरूक करता है। वोवेल्स जपने से हमारा मन शांत रहता है और हमें ज़्यादा ऐसिड (पित्त) नहीं बनता। पित्त बनना गले और खाने की नली के कैन्सर को जन्म देता है। इसको हम मेडिकल भाषा में एलपीआरडी बोलते हैं। अगर वोवेल्स जप करके हम अपने पैरसिम्पथेटिक सिस्टम को सतर्क रखेंगे तो हमें एलपीआरडी नहीं होगा।
खाने के बारे मैं डॉ त्यागी ने बताया कि हमें अँटी oxidants फ़ूड खाने चाहिए। जैसे हल्दी, काली मिर्च, लहसुन, अजवाइन, ब्रोकोली, टमाटर, तुलसी, निम, गलोए इत्यादि। उन्होंने कहा कि मिलावट का खाना खाने से बचें। क्योंकि उसमें कैन्सर बनाने वाले तत्व होते हैं। पूरा पेट भरकर कभी खाना न खाएं। थोड़ा-थोड़ा खाना खाएं और रात में खाने के बाद एकदम बिस्तर पर न लेटें। कम से कम दो घंटे बैठें। डॉ त्यागी ने कहा कि खाने मैं सभी प्रकार का स्वाद और रंग का इस्तेमाल करें। पानी शरीर के वजन के हिसाब से पीएं। उदाहरण के लिए अगर मैं 60 किलो का हूं तो मुझे तीन लीटर पानी पीना चाहिए। अगर हम ऊपरी सभी बातों का ध्यान देंगे तो 70 फीसदी गले के कैन्सर से बचाव कर सकते हैं।


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