गाजियाबाद पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी, 8 अंतरराज्जीय साइबर अपराधी गिरफ्तार

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता

गाजियाबाद। पुलिस ने शनिवार को आरडीसी राजनगर में चलने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आठ आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, नौकरी दिलाने हेतु फर्जी कागजात, भारी मात्रा में सिमकार्ड एवं नकदी तथा अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद हुए हैं। थाना कविनगर पुलिस मामले की गहन जांच-पड़ताल कर रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी के आदेश पर पुलिस अधीक्षक (अपराध) के कुशल नेतृत्व में नौकरी लगवाने एवं बीमा करवाने के नाम पर ठगी करने वाले इस अंतरराज्जीय गिरोह का पर्दाफास हुआ है। गिरफ्तार आरोपितों में स्वतन्त्र शर्मा (49) निवासी नेहरूनगर थाना सिहानीगेट गाजियाबाद, तुषार उर्फ आकाश तोमर (40) निवासी वेदविहार कालोनी थाना मोदीनगर, विक्रम सिंह यादव (45) निवासी कृष्णा नगर बागू थाना विजयनगर, ललित शर्मा (34) निवासी विवेकानन्द नगर थाना कविनगर, प्रीतम सिंह (40) निवासी मंगूपुरा नया मुरादाबाद जनपद मुरादाबाद, विशाल कुमार (24) निवासी विवेकानन्दनगर थाना कविनगर गाजियाबाद, संजय भारद्वाज (32) निवासी गोविन्दपुरम थाना कविनगर गाजियाबाद और हिमांशु शर्मा (20) निवासी एनआईटी फरीदाबाद हरियाणा शामिल हैं। इनके पास से 5 लैपटॉप, 28 मोबाइल फोन, 71 सिमकार्ड, 55200 रुपये की नकदी आदि बरामद हुए हैं।
पुलिस पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि हम लोग विभिन्न जाब पोर्टल जैसे नौकरी डाट काम आदि से नौकरी के लिए आवेदन किये हुए लोगों का डाटा रूपये देकर खरीदते हैं। प्राप्त डाटा के आधार पर आवेदकों के फोन पर नौकरी देने के नाम पर हम लोगों के द्वारा फोन/ई-मेल किये जाते हैं। साथ ही लोगों को विश्वास में लेकर उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र/इन्टरव्यू लेटर/काॅल लेटर उनके नम्बर पर प्रेषित किये जाते हैं और उन्हे एक व्हाटशएप नम्बर देकर उनसे सम्पर्क किया जाता है। लेटर भेजने के बाद उनसे रजिस्ट्रेशन/इन्टरव्यू कास्ट के नाम पर रूपये अपने गूगल पे/फोन पे/पेटीएम एकाउन्ट में डलवा दिया जाता है। उसके बाद जिस नम्बर से कैन्डीडेट को काल किया जाता था, उसे हम कुछ समय के लिए बन्द कर देते थे। दिन-भर में सैकड़ों लोगों को फोन किया जाता था, ज्यादातर ऐसे काल दूरस्थ प्रदेशों जैसे महाराष्ट्र, तेलांगना, उडीसा, पश्चिम बंगाल, आंधप्रदेश इत्यादि के नम्बरों पर किया जाता था, जिससे पीड़ित बार-बार पुलिस के पास ना जाए। दिन भर में लगभग 10-12 लोगझांसे में आ जाते थे, जिनसे हम रूपये डलवा लेते थे। हमारे गैंग के कुछ सदस्य काल करने एवं प्राप्त धन के ट्राजेक्सन के लिएसिम-कार्ड तथा बैंक एकाउन्ट उपलब्ध कराते थे, जिन्हें प्राप्त धन का 30 प्रतिशत इसके एवज् में कमीशन के तौर पर दिया जाता था।
आरोपितों के झांसे में आने वाले पीड़ितों में निखिल सर्वेदय निवासी मुम्बई महाराष्ट्र ने 180000, अब्दुल खान महाराष्ट्र ने 90000, सौविक मिस्त्री कोलकाता ने 82600, कैलाश रामेश्वर पार्क लोनी गाजियाबाद ने 77000, भानु एटा ने 50000, विशाल रूपचन्द काम्बले ब्रहम्पुरी महाराष्ट्र ने 30000, नागार्राजुन रेडी आन्धप्रदेश ने 28000, सुष्मा रेडी हैदराबाद ने 27000, रोहित संगम दिल्ली ने 22000, रमेश शहीदानिकेडा टन्डा ने 20000, सत्यजीत ओडिसा ने 20000, सोमनाथ करमाकर बाकपुरा बेस्ट बंगाल ने 20000, रोहित खरे तमिलनाडु ने 18000, शिवप्रिया चैन्नई ने 15000, गन्टिका कार्तिका विशाखापट्टनम ने 13000, प्रिन्स हुगली कर्नाटका ने 13000 और नरेश हैदराबाद ने 10000 रुपये दे चुके हैं। इन लोगों की शिकायत के आधार पर ही आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। जबकि इसी मामले के दो आरोपित प्रवीन शर्मा निवासी देहरादून उत्तराखण्ड और विकास निवासी बागू थाना विजयनगर गाजियाबाद फरार हैं। पुलिस इन दोनों को तलाश रही है।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*