सूर्य ग्रहण से पहले ही लग गया कोरोना का ग्रहण, मांगलिक कार्यों में पड़ रहा कोरोना का अमंगल

विवेक श्रीवास्तव

सुल्तानपुर । वैश्विक कोरोना महामारी संकट के बीच मांगलिक कार्यों में भी कोरोना का अमंगल ग्रहण इस साल सूर्य ग्रहण के पहले ही लग गया है। वर्षों से हाथ पीले होने की आस लगाए युवक-युवतियों के लिए कोरोना ने इंतजार की घड़ियां और बढ़ा दी हैं। हालांकि प्रदेश सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग अपनाते हुए शादियों के लिए छूट दे दी है लेकिन विवाह बंधन में अपनों से दूरी बनाए रखकर समारोह हो पाना दुर्लभ सा दिखता देता है। सूर्य ग्रहण के दुष्प्रभाव से उथल-पुथल की स्थित बनी रहने का अनुमान लगाया गया है।
शनिवार से हैं विवाह के मुहूर्तइस वर्ष हाथ पीले होने के लिए विवाह बंधन के मुहूर्त 25 अप्रैल को वैशाख मास की द्वितीया तिथि से रोहणी नक्षत्र में प्रारंभ हो रहे हैं जो 20 जून यानी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि तक हैं। लेकिन कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन के कारण परिवारों में विवाह के आयोजन की तैयारियां पूरी नहीं हो पा रही हैं। जिस कारण लोगों के पास विवाह की तारीख टालने के अलावा और रास्ता नहीं बचा है।


इन तिथियों में लगेगा ग्रहण

विक्रम संवत् 2077 यानी इस वर्ष  21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा। भागवताचार्य पंडित कृष्णकांत मालवीय बताते हैं कि यह खंड सूर्य ग्रहण होगा जो हरियाणा, राजस्थान के सूरतगढ़ और उप्र के सहारनपुर के आसपास संकलाकृति के रूप में दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि सूर्य ग्रहण चूड़ामणि योग में पड़ेगा जिसके प्रभाव से तूफान, महारोग, कम बारिश, राजनीतिक उथल-पुथल और पर्वतीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चलने के दुष्परिणाम हो सकते हैं। पंडित मालवीय के मुताबिक इसी वर्ष 5 जून यानी जेष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णमासी को चंद्र ग्रहण भी लगेगा जो भारत में भी दिखाई देगा। लेकिन इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। इसके अलावा इसी वर्ष 5 जुलाई और 30 नवंबर को उपछाया चंद्र ग्रहण भी लगेगा जो देश में दिखाई देगा। लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसका भेद अधिक नहीं होगा फिर भी लोगों को सूर्य और चंद्र ग्रहण के भेद मिटाने के लिये उपाय करने चाहिए। उन्होंने बताया कि जिन परिवारों में मांगलिक कार्य कोरोना और लॉक डाउन के कारण टल रहे हैं वे सूर्य ग्रहण का दोष मिटाने के उपाय अवश्य करें।

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