- राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
- जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर एवं राज्य महिला आयोग उत्तर प्रदेश को भेजा ज्ञापन
गौतमबुद्धनगर। जिले के अस्पतालों की गैरजिम्मेदारी के कारण पिछले दिनों एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत का मामला गरमाता जा रहा है। सोमवार को इस घटना से क्षुब्ध सामाजिक संगठन ‘महिला उन्नति संस्था’ ने दोषी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कारवाई करने की मांग की है। संगठन ने इस आशय का जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भी उप जिलाधिकारी (प्रशासन) दिवाकर सिंह को सौंपा है।
उल्लेखनीय है कि घटना शुक्रवार की है। महिला उन्नति संस्था की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गौतम ने बताया कि एक गर्भवती महिला इलाज के लिए जनपद के आठ अस्पतालों में 13 घन्टे तक चक्कर लगाती रही। लेकिन इन अस्पतालों ने उसका इलाज नहीं किया। आखिरकार गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे ने दम तोड़ दिया। अस्पतालों के इस गैरजिम्मेदार रवैये ने बेहद असंवेदनशीलता का परिचय दिया है, जो अक्ष्मय है।
सोमवार को भी इस घटना से क्षुब्ध महिला उन्नति संस्था ने एक बैठक की। संस्थापक डा राहुल वर्मा ने मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कड़ी निंदा की और इसे मानवता को शर्मसार करने वाली घटना बताया । उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार ने बीमार गर्भवती नीलम के इलाज हेतु 13 घंटे तक जनपद के नामचीन सात अस्पतालों के चक्कर काटे। उनसे इलाज के लिए मिन्नतें की, मगर किसी भी ने नीलम का इलाज नहीं किया। आखिरकार इलाज न मिलने के कारण नीलम ने दम तोड़ दियाद्ध साथ उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई ।
डॉ वर्मा ने दोषी अस्पतालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद मुहैया कराने के लिये जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर एवं राज्य महिला आयोग उत्तर प्रदेश को एक ज्ञापन भेजा है। साथ ही जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में लीपापोती करने की कोशिश की गयी और दोषी अस्पतालों पर सख्त कारवाई नहीं की गई या पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद नहीं मिली तो संस्था आन्दोलन छेड़ने को मजबूर होगी। वहीं इस घटना को लेकर जनपद वासियों में भी भारी रोष है। ज्ञापन देने के दौरान संस्था के महासचिव अनिल भाटी और रणवीर चौधरी आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।


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