कृष्णा द्विवेदी
प्रत्येक मनुष्य जिस दिन इस धरती पर जन्म पाता है, वही दिन उसका जन्मदिन होता है। कुछ का तो अवतरण दिवस होता है, जिसे युग-युगांतर से दुनियां मनाती आई है तो कुछ का सदियों से मनाया जाता रहा है पर यह लोग महामानव या अवतार की कोटि में आते हैं। साधारण मनुष्य को तो स्वयं ही मनाना पड़ता है। उसे मनाना भी चाहिये, क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने परिवार के लिए या उसका परिवार उसके लिए अति विशिष्ट स्थान रखता है। इन छोटी-छोटी खुशियों से परिवार को बहुत सम्बल मिलता है।
अब आइए इसके दूसरे पहलू यानि आशीर्वाद पर। फेसबुक आने से सभी का जन्मदिन सभी को पता हो जाता है। कुछ लोग तो अब भी समुचित लीक पर ही चल रहे हैं परंतु कुछ लोगों का तो आशीर्वाद मांगने का तरीका भी बड़ा विचित्र है जैसे- आज मेरी बेटी/बेटे का जन्मदिन है, आपका आशीर्वाद चाहिए या आपका आशीर्वाद तो बनता ही है। अगर उनका स्वयं का हुआ तो ऐसे प्रचारित करेंगे जैसे अगर उनका जन्म न हुआ होता तो बहुत पहले ही धरती शेषनाग के फन से समुद्र में कूद गई होती। अरे भाई, शुभकामना और आशीर्वाद आपके लिए अवश्य बनता है पर यह ध्यान रखें कि आशीर्वाद लेने का भी कोई तरीका होता है।
अगर आप अपनी परम्परानुसार प्रणाम, चरणस्पर्श, राम-राम, राधे-राधे, जय श्रीश्याम, पैलगी, जय जिनेन्द्र, सत श्री अकाल कुछ भी बोल दें या बच्चे की तरफ से लिख दें तो आपको शुभकामना व आशीर्वाद मांगना नहीं पड़ेगा। सैकड़ों हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में आपके मस्तक की तरफ उठ जाएंगे, परिचितों की छोडि़ए अपरिचित भी शुभकामना अवश्य देंगे। सत्य है हृदय की गहराई से निकले हुए आशीष वचन कभी व्यर्थ नहीं जाते हैं।
(लेखक चिंतक व समाजसेवी हैं।)


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