राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ईएनटी सर्जन डॉ बी.पी. त्यागी ने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स समेत कई अवार्ड प्राप्त किए हैं। उन्होंने विश्व में पहली बार जेल में जाकर मरीजों के ऑपरेशन किए। इसके लिए उन्हें बैकॉक में हिंद रत्न अवॉर्ड से नवाजा गया। यह अवॉर्ड एनआरआई वेलफेयर सोसायटी ऑफ इंडिया की ओर से प्रदान किया गया है। डॉ. बी.पी. त्यागी अवेकिंग इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य भी हैं। इसके अलावा साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा से भी जुड़े हैं।
गाजियाबाद के मशहूर डॉ. बी.पी. त्यागी जीवन का आधार आनंद, रस और अनुराग को मानते हैं। वे कहते हैं जिसके जीवन में आनंद और रस का ह्रास हो गया, उसका किसी न किसी रूप में रोग का मार्ग पकडऩा निश्चित है। देश के लिए यह बड़े गौरव की बात है कि चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. त्यागी और उनकी टीम ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। निसंदेह वे आगे भी इतिहास रचेंगे। आजकल पूरा विश्व कोरोना महामारी से ग्रस्त है। करीब 1.62 करोड़ लोग संक्रमित हैं और 6.48 लाख लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। अभी तक इसकी कोई दवा नहीं ईजाद हुई है लेकिन डॉ बी. पी. त्यागी इस महामारी को संगीत और मंत्र जाप के बल पर हराने की बात करते हैं। यह तो एकचमत्कार ही लगता है। राष्ट्रीय जनमोर्चा के ब्यूरो चीफ ने इन्हीं मुद्दों पर डॉ बी.पी. त्यागी से बातचीत की। प्रस्तुत है उसके मुख्य अंश:
क्या संगीत और मंत्र जाप करने से कोरोना महामारी से बचा जा सकता है?
स्वरों का संगीत और मंत्र का जपना पैरासिम्पेथेटिक-सिस्टम को उत्तेजित करता है। स्वरों का जाप करने से शरीर की प्रतिरोधक (इम्यूनिटी) छमता बढ़ती है। खासकर मंत्र का जाप करने से। कोई भी व्यक्ति मंत्र जाप से अपनी प्रतिरोधक शक्ति बढ़ा सकता है।
गीत-संगीत से हम कोरोना संक्रमण कैसे रोक सकते हैं?
जी, यह संभव है। गीत-संगीत से जो ध्वनि निकलती है और जो स्वर गूंजता है, उससे किसी भी वायरल और बैक्टीरिया के संक्रमण को रोका जा सकता है। संगीत वाद्ययंत्र बजाने से कोई भी व्यक्ति अपने पैरासिम्पेथेटिक-सिस्टम को जगा सकता है। उत्तेजित कर सकता है। इस दिशा में एआईआईएमएस (एम्स) और आरएमएल में बकायदा शोध हुआ है। दिल्ली के इन अस्पतालों में गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के जाप करने से याह बात सबित हुई है। आप देखिए- हिन्दू धर्मशास्त्र के हिसाब से हर भगवान के पास एक वाद्य यंत्र होता है। श्रीकृष्ण- बाँसुरी, भगवान शिव- डमरू, मां सरस्वती- सितार, भगवान श्रीविष्णु- शंख इत्यादि। यहां तक कि बीतों दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कोरोना काल में सभी से गुजारिश की थी कि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए थाली, ताली और शंख बजाएं। उस समय देश के करीब-करीब सभी संगीतकारों ने बॉलकनी में खड़े होकर गीत गाए थे।
हैप्पी हाईपोक्सिया क्या होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है?
कोरोना इन्फेक्शन का तीन से पांच दिन में अगर सांस फूलती है और छह मिनट चलने से हमारी ऑक्सीजन 6 प्रतिशत गिर जाती है तो उसको हैप्पी हाईपोक्सिया कहते हैं। इसकी वजह से कोरोना इन्फे क्शन में मृत्यु दर तीन प्रतिशत है। इस दौरान अगर खून को पतला करने की दवा नहीं ली गई और ऑक्सीजन नहीं दी गई तो मरीज की जान भी जा सकती है।
स्वांस लेने में क्यों होती है परेशानी?
कोरोना वायरस के लक्षण जैसे दस्त, बुखार, खाँसी, बदन दर्द, स्वाद का व ख़ुशबू का न आना को पहला दिन मानें तो तीसरे से पाँचवे दिन में स्वाँस के रास्ते में सूजन आती है और खून गाढ़ा होने लगता है। मरीज हल्का-हल्का स्वाँस लेने में परेशानी महसूस करता है। जो मरीज तीसरे दिन डॉक्टर के सम्पर्क में आ जाता है, कोरोना उसको अधिक हानि नहीं पहुंचा पाएगा, लेकिन अगर किसी भी मरीज ने इस लक्षण को हल्के में लिया या नजरअंदाज किया तो जान जाने का भी खतरा होता है। क्योंकि कोरोना उसके फेफड़े में इन्फ़ेक्शन (निमोनिया) कर सकता है और इसमें मरीज की जान जा सकती है। इसको हम पल्मनरी कोरोना भी बोलते हैं।
क्या भोजन से भी कोरोना का कोई संबंध है? भोजन करने में हमें क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
कोरोना को इस बात के लिए हमें धन्यवाद करना चाहिए कि उसने समाज को जीने का सलीका और संस्कार सिखा दिया। खासकर भोजन में क्या खाना है और हाथ साफ कर के खाना है। भोजन में सात रंग (इंद्रधनुष) और छह तरह के स्वाद होने चाहिए। जैसे बैंगनी (बैंगन, जामुन, चुकंदर), जामुनी (जामुन, बेरीज, अमरूद), नीला (बेरीज), हरा (सभी हरी सब्जियां), पीला (केला, हल्दी, गाजर, आम, दालें), नारंगी (संतरा, नींबू, कीनू) और लाल (टमाटर, रेडबेरीज, सेब, लाल मिर्च) रंग। इसी तरह भोजन में 6 प्रकार के स्वाद होतें हैं। मीठा, नमकीन, कड़वा, खट्टा, कसैला और मसालेदार। इसके साथ हमें चावल,आटा (गेहूं, मक्का, चना, बाजरा), बादाम, अखरोट, काजू, छुवारे, किसमिस इत्यादि का सेवन करना चाहिए। कोरोना के लिए अगर कसैले स्वाद का भोजन लें तो और भी अच्छा है। जैसे- करेला, आंवला इत्यादि।
आजकल कई कंपनियों ने इम्यूनिटी बढ़ाने की दवा बेचनी शुरू कर दी है। अधिकतर लोग इसका सेवन कर रहे हैं। इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता?
मेरे देश की खासियत है कि लोग डॉक्टरों की कम, लोगों की ज्यादा सुनते हैं। यही कोरोना महामारी के दौरान भी देखने को मिल रहा है। हर कोई खाना-पानी छोडक़र सिर्फ और सिर्फ अपनी इम्यूनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने की धुन में लगा है। इसी तरह जिस दवा कम्पनी को देखो, वही अपना नया इम्यून ड्रग मार्केट में उतारने की बात करता है। उनके दिमाग में शायद यह बात है कि 135 करोड़ लोगों को वे अपना उत्पाद बेचकर बिना किसी मेहनत के करोड़पति बन सकते हैं। सरकारी मशीनरी भी उन्हीं के साथ है। बिना किसी मानक के दवा को पास किए जा रहे हैं और लोग हैं कि बड़े मार्क/ब्रांड देखकर उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसे देखो वही इम्यूनिटी बढ़ाने में लगा है। यहां तक कि तमाम लोग किसी डॉक्टर से इस बारे में सलाह तक नहीं लेते। जबकि हमें यह भी सोचना चाहिए कि किसी भी चीज की अति ठीक नहीं है। लोग इम्यूनिटी बढ़ाने की अति कर रहे हैं। शोध बताता है कि ज़्यादा इम्यूनिटी बढ़ाने से साइटोकिन तूफान आता है और कुछ शोध इसका खंडन भी करते हैं। लेकिन हमारी सलाह है कि बिना किसी चिकित्सक के सलाह के प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कोई भी दवा इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। क्योंकि साइटोकिन तूफान गंभीर कोविड-19 रोगियों की पर्याप्त संख्या को प्रभावित करता है।


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