राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
जयपुर। राजस्थान में दिल दहला देने वाली एक वारदात सामने आई है। यहां के करौली ज़िले की सपोटरा तहसील मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर बूकना गांव में एक मंदिर के पुरोहित को जमीनी विवाद के चलते जिंदा जला दिया गया। पुरोहित ने जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में गुरुवार 8 अक्टूबर की रात दम तोड़ दिया। इस घटना के विरोध में परिवार के सदस्यों और बस्ती के लोगों ने शव का अंतिम दाह-संस्कार करने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक कि उनकी सभी मांगें राज्य सरकार नहीं मान लेती वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
घटनाक्रम जान-सुनकर दिल दहल जाता है। करौली में दबंगों ने पहले पुरोहित बाबूलाल के ऊपर पेट्रोल डाला, फिर आग लगा दी। पुरोहित कराहता और गिड़गिड़ता रहा, लेकिन उन हैवानों ने उन्हें मार ही डाला। जयपुर के सवाई माधो सिंह अस्पताल में पुरोहित ने दम तोड़ दिया। इसके बाद से राजस्थान की सियासत गरमा गई है। पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
करौली के पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने राष्ट्रीय जनर्मोचा को बताया, “डाइंग डिक्लेरेशन में बाबूलाल वैष्णव ने पांच लोगों पर पेट्रोल डाल कर जलाने का आरोप लगाया है। थाना सपोटरा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। जमीनी विवाद के चलते यह घटना हुई है। दोनों ही पक्षों में से किसी ने भी पूर्व में पुलिस को किसी भी तरह के विवाद की सूचना नहीं दी थी। यह घटना अचानक ही हुई है। पांच नामजद आरोपियों में मुख्य आरोपित कैलाश मीणा को हमने गिरफ़्तार कर लिया है। बाकी के आरोपितों को भी शीघ्र ही गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।”
दूसरी ओर शनिवार को मंदिर के पुजारी बाबूलाल के एक रिश्तेदार ललित ने कहा है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। परिजनों की मांग है कि उन्हें 50 लाख रुपये मुआवजा और एक सरकारी नौकरी दी जाए। सभी आरोपितों को गिरफ्तार किया जाए और आरोपियों का समर्थन करने वाले पटवारी व पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा बाबूलाल के परिवार ने अपनी सुरक्षा की मांग भी की है।


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