ऑपरेशन- 420: गाजियाबाद में दो अलग-अलग मामलों में 8 आरोपित गिरफ्तार

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। जिले की पुलिस ने ऑपरेशन-420 के तहत अभियान चलाकर दो अलग-अलग मामलों में कुल आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पहले मामले में एक नेपाली को पुलिस ने पकड़ा है, जबकि दूसरे केस में सात लोगों के गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर फर्जी रोडवेज की तीन बसें बरामद की हैं। आगे की जांच जारी है।
एसएसपी कलानिधि नैथानी के अनुसार जिले में अपराधियों की धर- पकड़ के लिए ऑपरेशन- 420 के तहत अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत मोदीनगर थाना पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का प्रयास करने वाले एक नेपाली व्यक्ति मेघराज शर्मा को गिरफ्तार किया है। वह केएन मोदी इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एवं केएनजीडी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मोदीनगर में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के रूप में कार्यरत था।
आरोपित मेघराज शर्मा पुत्र दुर्गादत्त शर्मा मूलत: नेपाल का रहने वाला है। वह फर्जी कागजातों के आधार पर भारतीय नागरिकता के विभिन्न दस्तावेज बनवाना चाहता था। उसने पासपोर्ट बनवाने के लिए भी प्रयास किया था। छानबीन की गई तो मामला सामने आया और आरोपित मेघराज को गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले भी मेघराज शर्मा दो बार पते बदलकर पासपोर्ट बनवाने के लिए अप्लाई कर चुका था, लेकिन अब तीसरी बार पासपोर्ट बनाने के लिए अप्लाई करते ही उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया। इससे पहले मेघराज ने सन् 2009 में जन्म स्थान दिल्ली बताया था और 2018 में जन्म स्थान मिर्जापुर दर्शाते हुए पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। इस बार 2020 में इसने जन्म स्थान मोदीनगर बताया। अंतत: क्षेत्राधिकारी अभिसूचना इकाई की रिपोर्ट के आधार पर मेघराज शर्मा को थाना मोदीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।
दूसरा मामला थाना लिंक रोड अंतर्गत का है। यहां की पुलिस ने ऑपरेशन- 420 के तहत यातायात पुलिस और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की टीम के सहयोग से अवैध तरीके से संचालित की जा रही फर्जी रोडवेज की तीन बसों को कौशांबी बस डिपो के पास से बरामद किया है। साथ ही इस मामले में मालिक, चालक व परिचालक सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी उत्तर प्रदेश परिवहन की बसों की तरह ही प्राइवेट बसों पर स्लोगन एवं मोनोग्राम आदि बनाकर कौशांबी रोडवेज बस डिपो के पास से सवारियों को भ्रमित करते हुए आवाज लगाकर बिठा लेते थे। यात्रियों को तब असलियत पता चलती थी जब वे टिकट लेते थे।आगे की जांच-पड़ताल पुलिस कर रही है।

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