यूपी के कासगंज में शराब माफिया का पुलिस पर हमला, सिपाही की हत्या और दारोगा को किया अधमरा

माफिया के हमले में सिपाही की मौत, दारोगा की हालत चिंताजनक

जितेन्द्र बच्चन
– मुठभेड़ में माफिया मोती का भाई ढेर, सर्च ऑपरेशन जारी
कासगंज। उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में एक बार फिर कानपुर के बिकरू कांड जैसी घटना सामने आई है। यहां अवैध शराब के कारोबार को बंद कराने पहुंची पुलिस टीम पर शराब माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया। एक सिपाही की हत्या कर दी और एक दारोगा को अधमरा कर के खेत में फेंक दिया। इस घटना का पता चलते ही आज बुधवार की सुबह पुलिस फोर्स और पीएसी के जवान मौके पर पहुंचे तो काली नदी के खादर में मुठभेड़ शुरू हो गई। मामले के मुख्य आरोपित के भाई को पुलिस ने ढेर कर दिया। बाकी के बदमाश भाग गए। पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी है।
हमलावरों पर लगेगा एनएसए: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
10 फरवरी को एडीजी (कासगंज) अजय आनंद ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया कि शराब माफिया के हमले में शहीद सिपाही देवेन्द्र का शव बरामद कर लिया गया है। उसके साथ-साथ दारोगा अशोक को भी बदमाशों ने बंधक बना लिया था। बाद में दरोगा अशोक लहूलुहान हालत में एक खेत से मिले और सिपाही की लाश दूसरी जगह से बरामद हुई। दारोगा को बहुत बुरी तरह से मारा-पीटा गया है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। उधर इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर सख्त हैं। उन्होंने पुलिस के हमलावरों पर एनएसए लगाने का आदेश दिया है और शहीद सिपाही के परिजनों को सरकार ने 50 लाख रुपये आर्थिक मदद करने की घोषणा की है।
माफिया के निशाने पर पुलिस:
दरअसल, प्रदेश में शराब और खनन माफिया के निशाने पर है यूपी पुलिस। कासगंज में बिकरू कांड के बाद पुलिस पर दूसरा बड़ा हमला है यह। सूबे के बदमाश लगता है बेखौफ हैं। दारोगा और सिपाही नगला धीमर गांव में दबिश देने गए थे। इस गांव में कच्ची शराब बनती है। कुख्यात शराब माफिया मोती धीमर और उससे जुड़े अन्य मदमाशों को पकड़ना था लेकिन माफिया ने दोनों को बंधक बना लिया। उनकी वर्दी उतरवा दी और बुरी तरह से मारा-पीटा। इतनी क्रूरता से अपराधी पुलिस के साथ पेश आए कि सिपाही देवेन्द्र का सिर फट गया। उसकी लाश मिली और दारोगा को अधमरा कर के खेत में फेंका दिया था।
मुठभेड़ में मोती का भाई ढेर:
एसपी मनोज सोनकर के अनुसार दोनों पुलिसकर्मी मोतीराम धीमर के घर पर कुर्की के आदेश का नोटिस चस्पा करने गए थे। वहां उन्हें बंधक बना लिया गया। वर्दी फाड़ दी। मोटरसाइकिल कब्जे में कर ली। पिस्टल लूट ली। सिपाही देवेन्द्र का सिर फाड़ दिया। उसका शव घटनास्थल से डेढ किलोमीटर दूर एक खेत में मिला। दारोगा के साथ भी क्रूरता दिखाई गई। अधमरा कर दिया था। इसका पता चलते ही आज बुधवार की सुबह पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। वहां काली नदी के खादर में आरोपियों से मुठभेड़ हो गई। मुख्य आरोपित मोती का भाई एलकार गोली लगने से घायल हो गया। बाकी के बदमाश भाग गए। एलकार को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मोती फरार है। उसकी तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
पुलिस से फिर हुई चूक:
यह तो निश्चित है कि आज नहीं तो कल बल्कि यूं कहें कि जल्द ही शराब माफिया और उसके गिरोह के लोग कानून की गिरफ्त में होंगे। लेकिन यह भी कहना गलत नहीं होगा कि यहां एक बार फिर पुलिस से चूक हुई है। अगर यह पता था कि मोती धीमर एक शराब माफिया है और कई मामलों में उसकी तलाश है तो पुलिस को पूरी तैयारी के साथ ज्यादा फोर्स लेकर जाना चाहिए था।

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