राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा विधानसभा में मंगलवार को प्रस्तुत दिल्ली का बजट राजधानी दिल्ली के व्यापारियों के लिए एक निराशाजनक दस्तावेज है, क्योंकि दिल्ली के बजट में व्यापार और वाणिज्य के लिए एक भी शब्द नहीं बोला गया है। दिल्ली का बजट व्यापारिक समुदाय के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नकारात्मक रवैये को दर्शाता है। दिल्ली सरकार के बजट पर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली का बजट कारोबारियों के लिए बेमानी है। हम इसकी निंदा करते हैं।
खंडेलवाल ने कहा कि यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे समय में जब राजधानी दिल्ली का व्यापार बड़े वित्तीय दबाव में है और कोविड-19 महामारी के प्रतिकूल प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहा है। दिल्ली सरकार ने बजट में दिल्ली में व्यापार के विकास के लिए कोई निधि आवंटित नहीं की है। उन्होंने कहा कि ये अफ़सोस है कि दिल्ली सरकार ने उन व्यापारियों की ओर ध्यान ही नहीं दिया जो वर्तमान में कोरोना की वजह से बड़े वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं।
कैट महासचिव ने कहा कि यह भी आश्चर्यजनक है कि बजट में व्यापारिक समुदाय के लिए एक भी योजना की घोषणा नहीं की गई है और न ही दिल्ली में व्यापार और वाणिज्य को सुव्यवस्थित करने के लिए किसी नीतिगत उपाय की घोषणा की गई है। दिल्ली में साइबर हब स्थापित करने की कोई योजना घोषित नहीं की गई है, जबकि दिल्ली का राजस्व पड़ोसी शहरों गुड़गांव और नोएडा में स्थानांतरित हो रहा है।
खंडेलवाल ने आगे कहा कि दिल्ली देश में व्यापार का सबसे बड़ा वितरण केंद्र है और दिल्ली का राजस्व व्यापार पर काफी हद तक निर्भर है। उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद थी कि केजरीवाल सरकार व्यापार के लिए कुछ करेगी, लेकिन दुर्भाग्य से दिल्ली सरकार ने इस ओर बजट में कोई ध्यान ही नहीं दिया है। इसलिए दिल्ली सरकार के बजट की जितनी भी निंदा की जाए कम है।


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