राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों ने मंगलवार को शहीद-ए-आजम भगत सिंह, शहीद सुखदेव और शहीद राजगुरु को श्रद्धांजलि दी। बलिदान दिवस मनाया और शहीदों की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। साथ ही इस मौके पर किसानों, युवकों और बच्चों- महिलाओं ने बसंती पगड़ी पहनकर तिरंगे हाथ में लिए एक जुलूश भी निकाला। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियाँ और बैनर ले रखे थे, जिन पर कृषि के तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग लिखी थी।
कार्यक्रम का संचालन ओमपाल मलिक ने किया। राजवीर सिंह जादौन, सरदार जगतार सिंह बाजवा, राजबीर सिंह, शमशेर सिंह राणा, चौधरी बिजेंद्र सिंह आदि ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर वक्ताओं ने सरदार भगत सिंह को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी माता से कहा था कि मैं फिर जन्म लूँगा। माता ने पूछा था कि बेटा मैं तुझे पहचानूँगी कैसे? सरदार भगत सिंह ने बड़ी सरलता और विश्वास से जवाब दिया था कि जो भी क्राँतिकारी होगा, उसी में अपना भगत सिंह देखना।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शमशेर राणा ने बताया कि कार्यक्रम में गायक सोनिया मान और अजय हुड्डा ने देश भक्ति की गीतों से समा बांध दिया। कई ग्रुप ने नाटक प्रस्तुत किए। इससे आंदोलनकारी किसानों को शहीदों की बारे में तमाम जानकारी हुई। हजारों की संख्या में किसान मौजूद थे। वहीं मंगलवार को जिन किसानों ने अनशन किया, उनमें हरवेल सिंह, गुरदीप सिंह फौजी, अनुराग फौजी, सत्य प्रकाश यादव फौजी, चौधरी तेजपाल सिंह, मनजीत सिंह बाजवा, मणि देव चतुर्वेदी फौजी, अकबर, पंडित अर्जुन, करण सिंह, मूलचंद, कुलदीप सिंह चीमा, गोपाल सिंह, सूबेदार मेजर जयप्रकाश मिश्र, हरविंदर सिंह राणा, देशा सिंह फौजी और नसरुद्दीन शामिल रहे।


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