नई दिल्लीक। कृषि क़ानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि वे किसान नहीं हैं। इसका संज्ञान भी लेना चाहिए, ये आपराधिक गतिविधियां हैं। जो कुछ 26 जनवरी को हुआ, वो भी शर्मनाक था। आपराधिक गतिविधियां थी, उसमें विपक्ष द्वारा ऐसी चीजों को बढ़ावा दिया गया।
गुरुवार, 22 जुलाई को मीनाक्षी लेखी ने तर्क दिया कि इस प्रदर्शन की आड़ में कुछ बिचौलियों की मदद की जा रही है। किसान आंदोलन की आड़ में पॉलिटिकल एजेंडे को धार दी जा रही है और सिर्फ एक नेरेटिव को आगे बढ़ाया जा रहा है। दूसरी तरफ किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों के बारे में ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए। किसान देश का अन्नदाता है। शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने का ये भी एक तरीका है। जब तक संसद चलेगी, हम यहां आते रहेंगे। सरकार चाहेगी तो बातचीत शुरू हो जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रदर्शन कर रहे किसानों से फिर बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है। उनकी तरफ से कहा गया है कि सरकार बातचीत करने के लिए तैयार हैं।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार और पुलिस से अनुमति मिलने के बावजूद गुरुवार को जंतर मंतर पर तीन कृषि कानूनों को रद करने के लिए किसानों किसानों का प्रदर्शन हो रहा है। दो सौ किसानों में संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के साथ भाकियू नेता राकेश टिकैत भी शामिल हैं। किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि ऐसी टिप्पणी भारत के 80 करोड़ किसानों का अपमान है। अगर हम गुंडे हैं तो मीनाक्षी लेखी जी को हमारे द्वारा उगाए गए अनाज को खाना बंद कर देना चाहिए। उन्हेंो खुद पर शर्म आनी चाहिए। हमने उनके बयान की निंदा करते हुए ‘किसान संसद’ में एक प्रस्ताव पारित किया है।


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