राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। मां ने जिन बेटों को पाल-पोसकर बड़ा किया और अपने बुढ़ापे का सहारा समझा, उन्हीं बच्चों ने उसे मार-पीटकर घर से बाहर निकाल दिया। दो वक्त की रोटी तो देना दूर, उसी के घर से उसे बाहर कर दिया गया। वह भी अपने जिगर के टुकड़ों ने। विजय नगर सेक्टर 9 की पुलिस चौकी के पास वह वृद्धा अकेली बैठी रही। धीरे-धीरे शाम का अंधेरा बढ़ने लगा तो आसपास के लोगों को चिंता हुई। सामाजिक संस्था ‘ममता की छांव’ की कुछ महिला कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर बूढ़ी मां से उसका हाल पूछा। तब पता चला कि उसके बेटों ने ही उसकी यह दुगर्ति की है। घुटनों पर इतनी चोट पहुंचाई है कि चलना-फिरना मुश्किल हो गया है। बड़ी मुश्किल से महिला कार्यकर्ताओं ने उन्हें वृद्धाश्रम पहुंचाया।
शुक्रवार, 13 अगस्त का वह मनहूस दिन। वृद्धा पुलिस चौकी के पास सारा दिन पड़ी रही। स्थानीय कुछ बहनों ने उन्हें खाने के लिए दिया। शाम तक जब मां को लेने कोई नहीं आया तो सामाजिक संस्था ममता की छांव सेवा ट्रस्ट की बहनों को सूचना दी गई। ट्रस्ट की सचिव सीमा शर्मा, समिति की अध्यक्ष श्रीमती मंजू त्रिपाठी और सदस्य श्रीमती संजू त्रिपाठी मौके पर पहुंची। उन तीनों महिलाओं को देखते ही वृद्धा ने रोना शुरू कर दिया। बेटों के डर के मारे वह अपना नाम-पता भी नहीं बता रही थीं।
बुजुर्ग मां ने बहुत समझाने-बुझाने के बाद बताया कि उसके तीन बेटे हैं। उन तीनों ने उसे बहुत मारा-पीटा है। देखने पर पता चला कि घुटनों पर इतनी चोट है कि उनका चलना-फिरना मुश्किल हो रहा है। अंतत: संस्था की महिलाओं ने प्रशासन की आज्ञा लेकर बुजुर्ग महिला को दुहाई स्थित शासकीय वृद्धाश्रम पहुंचाया। आश्रम की प्रमुख इंदू कुलश्रेष्ठ अब इस बूढ़ी मां की देखभाल कर रही हैं। ममता की छांव सेवा ट्रस्ट ने उनका दिल से शुक्रिया अदा किया है। साथ ही ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया कि इंदू कुलश्रेष्ठ बेसहारा महिलाओं की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। साथ ही सीमा शर्मा ने यह भी जोड़ा कि मां की हालत देखकर बहुत चिंता हो रही है। अगर बेटे ऐसे होते हैं तो इससे बेहतर है कि वे न हों। भगवान कभी किसी को इस मोड़ पर लाकर न खड़ा करे।


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