‘चितेरा दर्पण’ प्रदर्शनी का समापन, सुरेशपाल वर्मा जसाला का लोगों ने किया सम्मान

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। संस्कार भारती की कला दीर्घा में 08 से 14 जून 2022 तक चली सुरेशपाल वर्मा जसाला की मनोहरी प्रदर्शनी का मंगलवार को समापन हो गया। उनकी शानदार चित्रकारी अनोखी छटा के साथ लोगों को लुभाती रही। खासकर सुतली का प्रयोग कर बनाई गई कलाकृतियों ने मन मोह लिया। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों उनकी खूब तारीफ की, जिसका प्रमाण है प्रदर्शनी में उमड़ी भीड़, चित्रों को निहारते लाग और कैमरों में कैद करने को उत्सुक दर्शक। इस अवसर पर युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच ने सुरेशपाल वर्मा जसाला को एक अभिनंदन पत्र, पटका और मोतियों की माला से सम्मानित कर उन्हें ‘चितेरा दर्पण’ प्रदर्शनी की शुभकामनाएं दी है।
साहित्यकार सुरेशपाल वर्मा जसाला किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अब उन्होंने एक नये जोश-खरोश के साथ विभिन्न आयामों और विभिन्न माध्यमों में अनेकों कलाकृतियों की “चितेरा दर्पण” नाम से एकल प्रदर्शनी लगाकर कला क्षेत्र में भी अपनी धाक जमा दी है। उनकी चित्रकारी को देखकर जहां लोग आश्चर्य में हैं, वहीं उनके इस कलात्मक कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं। प्रदर्शनी में आए साहित्य, शिक्षा, कला, पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े लोगों के अलावा राजनीतिज्ञ और आमजन भी उपस्थिति रहे। सभी ने जसाला के प्रति अपना स्नेह उड़ेला और बार-बार उनकी इस नई विधा की तारीफ की है।
रस्सियों का प्रयोग बनी विशेष पहचान :
सोमवार को ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ के संपादक जितेन्द्र बच्चन और ‘समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के साहित्य प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रवीण कुमार ने भी गाजियाबाद से पहुंचकर सुरेशपाल वर्मा की प्रदर्शनी को देखा। उन्होंने कहा है कि जसाला जी की कला की नवीन एवं बहुआयामी कलाकृतियों ने लोगों के मनों पर विशेष छाप छोड़ी है। कलाकृतियों में रस्सियों का प्रयोग उनकी विशेष पहचान बनकर उभरी है। जल्दी ही उनकी यह पहचान देश की सीमाओं को लांघकर सात समुंदर पार तक पहुंचेगी।
दरसअल, सबके चहेते जसाला जी हर कर्म को एक अनुष्ठान मानकर, सोच- विचारकर, अंतर्मन से तथा लगन से काम करते हैं। यही उनकी सफलता का राज है। श्रीमद् भगवत गीता में श्री कृष्ण ने कहा है- ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ अर्थात कर्म करना आदमी का अधिकार है, उसे फल की इच्छा कभी नहीं करनी चाहिए। यह सब तो ईश्वर के अधीन है।
मनका विधा विश्व की सबसे छोटी रचना :
शिक्षा का क्षेत्र हो या साहित्य अथवा समाज सेवा का सरोकार, सुरेशपाल वर्मा जसाला एक जाने-माने व्यक्तित्व के धनी हैं। स्वभाव से मिलनसार, प्रेमी और सहयोगी व्यक्ति हैं। अब तक देश के विभिन्न क्षेत्रों से विभिन्न संस्थाओं द्वारा दर्जनों सम्मान उन्हें मिल चुके हैं। वर्ण पिरामिड एवं मनका नवविधाओं के जनक जसाला का साहित्य के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान है। उनकी मनका विधा विश्व की सबसे छोटी रचना है, जो पांच-पांच वर्ण की तीन पंक्तियों की रचना है। पहली दो अथवा दूसरी दो में तुकांत अनिवार्य है।
जसाला फाउंडेशन ट्रस्ट की स्थापना :
जन सेवा, कला और साहित्य की सेवा के उद्देश्य से जसाला ने नई संस्था “जसाला फाउंडेशन ट्रस्ट” की भी स्थापना की है। भविष्य में उनकी पेंटिंग्स से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा कवियों, साहित्यकारों, कलाकारों और जरूरतमंदों की सेवा के कार्यों को करने के लिए ट्रस्ट में जमा किया जाएगा। समाज सेवा की इस सोच को सभी ने सराहा है। निश्चित ही वे अपने इस मंगलकारी आयाम में भी सफल होंगे।
समापन समारोह में रहा नई पीढ़ी का वर्चस्व :
प्रर्दशनी के समापन समारोह में नई पीढ़ी का वर्चस्व रहा। ट्रू मीडिया की उपस्थिति में अनिल सागर, चन्द्र प्रकाश शर्मा, राजेश कुमार, राजकुमार शर्मा, मनोज राणा, दिनेश कुमार, ओमप्रकाश शुक्ल, आरुप घोष, आकाश, देव गुप्ता और अन्य सज्जनों को आशीर्वाद स्वरूप साहित्यिक पुस्तकें एवं पटका प्रदान किया गया। युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच की ओर से एक अभिनंदन पत्र, पटका और मोतियों की माला से जसाला जी का शुभकामनाओं सहित सम्मान किया गया। साथ ही सभी ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनकी उन्नति की कामना की है।

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