उस शिलान्यास का मैं भी साक्षी हूं

सुशील शर्मा/ राष्ट्रीय जनमोर्चा
गाजियाबाद। फिल्म नगरी मुंबई में ऐसे कई दिग्गज अभिनेता, सहायक अभिनेता, अभिनेत्री, निर्देशक और लेखक हैं जिनका नाता गाजियाबाद से रहा है। कभी गाजियाबाद में मुंबई से बड़ी फिल्म नगरी उस स्थान पर बनाए जाने का शिलान्यास हुआ था, जहां आज वसुंधरा है। यह सन् 1960 के दशक की बात है जब देश में और लगभग सभी प्रदेशों में कांग्रेस शासन था। तब नोएडा अस्तित्व में नहीं था। प्रदेश में चन्द्र भानु गुप्त की सरकार थी। नरेंद्र मोहन अस्पताल और फिल्म सिटी का उद्घाटन एक ही दिन हुआ था। उस समय मोहन मीकिन के मालिक नरेन्द्र नाथ मोहन के बड़े बेटे कर्नल वीआर मोहन मालिक थे। वह लखनऊ के मेयर भी रहे थे। नवाबी शहर का आधुनिक कायाकल्प उन्हीं के मेयर काल से शुरू हो गया था। वह फिल्म जूरी के भी सदस्य थे। नर्गिस दत्त उन्हें अपना भाई मानती थीं। उनके समय में दिलीप कुमार, सुनील दत्त सहित कई दिग्गज अभिनेता अभिनेत्री मोहन मीकिन के डायरेक्टर्स में थे।
गाजियाबाद में फिल्म नगरी का उद्घाटन तो हो गया था, जिसका साक्षी मैं भी रहा हूं। मैं अपने पिता वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्याम सुंदर वैद्य (तड़क वैद्य) के साथ अग्रिम पंक्ति में ही बैठा था। मुझे याद है, संभवतः कोई दिग्गज फिल्म निर्माता, अभिनेता, अभिनेत्री ही होगी जो उस कार्यक्रम में शामिल न हुआ हो। मोहन मीकिन से लोगों को कार्यक्रम में शामिल करने के लिए शहर में वाहन लगा दिए गए थे। उस समय मोहन मीकिन, मोहन कोला और मोहन औरेंज भी बनाते थे। सभी को वहां सर्व हुई थी। फिर अचानक प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ। चौधरी चरण सिंह की 1967 में संविद सरकार बनी। उन्होंने सबसे पहले गाजियाबाद की फिल्म सिटी को बनाए जाने का आदेश रद्द किया था। पुरानी स्मृति है उसे मैंने साझा किया है।
जिसकी पूरे प्रदेश में सराहना हुई :
मेरे फेसबुक मित्र लगभग 80 वर्षीय अभिनेता प्रेम प्रकाश कुमार ने मुझसे वार्ता में बताया कि जब वह मात्र 12-13 वर्ष के थे तो गाजियाबाद में स्टूडेंट ड्रामेटिक क्लब से जुड़कर थियेटर की शुरुआत की थी। उन्हीं दिनों आभूषण जी भी हमारे साथ जुड़ गए थे। कालान्तर में सर्विस के सिलसिले में दिल्ली आना- जाना हुआ तो वहां दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के ड्रामा एंड म्यूजिक ग्रुप में शामिल हुआ। फिर रेडियो आर्टिस्ट हाकर बना। उसके बाद आगरा अपने ननिहाल जाकर ताज कल्चरल क्लब की स्थापना की, जहां 1967 में आगरा कालिज में बिहार रिलीफ़ फंड के लिए एक म्यूज़िकल प्रोग्राम आयोजित किया। जिसकी पूरे प्रदेश में सराहना हुई। फिर मुंबई आया तो यहां एक अनोखे धारावाहिक ‘कहां गए वो लोग’ से एक अभिनेता और सहायक निर्देशक के तौर पर जुड़ गया। उस धारावाहिक के निर्माता उस समय के प्रसिद्ध अभिनेता धीरज कुमार थे। उनका साथ लम्बे समय तक रहा जो आज भी कायम है।
उन्होंने बड़ी फिल्में भी की हैं :
उन्होंने बताया कि मेरा सबसे लम्बा अभिनय धारावाहिक ‘संसार’ में रहा। जो 1993 से 1997 तक छाए रहा। पिछले दिनों धारावाहिक ‘जोधा अकबर’ के साथ भी लम्बा जुड़ाव रहा। उसके बाद ‘मेरे साईं’ के साथ भी जुड़ाव रहा। उन्होंने बताया कि मैंने कामर्शियल एड, शार्ट फिल्म के साथ अनगिनत एक्ट किये है और कर रहा हूं। कुछ नये प्रोजेक्ट पर भी बात चल रही है। प्रेम प्रकाश कुमार जी फिल्म डायरेक्टर एसोसिएशन व सिने एंड टी वी आर्टिस्ट एसोसिएशन के लाइफ मेम्बर हैं। वह लम्बे समय तक डबिंग डायरेक्टर रहे हैं। गाजियाबाद के दिग्गज रंगकर्मी आभूषण जी गाजियाबाद के स्टूडेंट ड्रामेटिक क्लब और महालक्ष्मी ड्रामेटिक क्लब के हरफनमौला कलाकार रहे हैं। वह लम्बे समय से दिल्ली की शोन्या नाट्य संस्थान, प्रतिबिंब नाट्य संस्थान व डीपीएल नाटक एंड सांस्कृतिक ग्रुप के सचिव हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन के सीरियलों के साथ ही उन्होंने एड फिल्में, लघु फिल्में व बड़ी फिल्में भी की हैं और कर रहे हैं। चर्चित फिल्म ‘बधाई हो’ में वह डॉक्टर की भूमिका में थे।
दिग्गज रंगकर्मी दिनेश खन्ना एनएसडी के डायरेक्टर रहे हैं :
कभी गाजियाबाद के तुराब नगर के निवासी रहे दिग्गज रंगकर्मी दिनेश खन्ना एनएसडी के डायरेक्टर रहे हैं और अभी पिछले दिनों ही लखनऊ स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी के निदेशक पर स्थानांतरित होकर गये हैं। शुरुआत में दूरदर्शन के सीरियलों में उन्होंने बहुत काम किया है।
दिग्गज अभिनेता हैं एसएम जहीर :
कभी मोहन मीकिन के रंगकर्मी रहे और वर्तमान में वसुंधरा निवासी दमदार आवाज के स्वामी एसएम जहीर ऐसे दिग्गज अभिनेता हैं जो लम्बे समय से धारावाहिकों और फिल्मों में काम कर रहे हैं। नीम का पेड़, हमलोग, बुनियाद, प्रेम रतन धन पायो से उन्हें प्रसिद्धि मिली। बेहतरीन अभिनेता हैं। शुरुआत से ही बड़ी उम्र का रोल करते रहे हैं। उनसे मेरी अक्सर मुलाकात गाजियाबाद के टाऊन हॉल में हो जाती थी। वह वहां बड़े बाबू नकवी जी के पास बैठे मिल जाते थे। गाजियाबाद जर्नलिस्ट्स क्लब के वृहद होली मिलन समारोह में हमने उनको सम्मानित भी किया था। शानदार व्यक्तित्व के इस दिग्गज अभिनेता को शुभकामनाएं।
और जल्द ही उन्हें फिल्मों में काम मिलने लगा :
1972-73 में जब मैं एम् एम् एच कालेज में ग्रेजुएशन कर रहा था। इस कालेज के पहले प्रिंसिपल बीएस माथुर ही तब प्रिंसिपल थे। सुरेन्द्र पाल मुझसे सीनियर थे। मेरे अभिन्न मित्र उस समय के बड़े छात्र नेता विजय पंडित (वर्तमान में गाजियाबाद के वरिष्ठ एडवोकेट) के इर्दगिर्द रहते थे। मेरे एक सहपाठी हरीश कक्कड़ के भी अभिन्न मित्र थे। उनके पिता डीएसपी रहे थे तथा भाई पीएन सिंह जीडीए में लम्बे समय तक पुलिस इंस्पेक्टर रहे हैं। सुरेन्द्र पाल की बहन रश्मि चौहान मुंबई चली गई थी, जहां वह और कई दिग्गज अभिनेता रहते थे। सुरेन्द्र पाल आकर्षक व्यक्तित्व और दमदार आवाज के स्वामी थे। जल्दी ही उन्हें फिल्मों में काम मिलना शुरू हो गया था। उन्होंने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत 1981 में शमा फिल्म से की। वह जोधा अकबर, ख़ुदा गवाह, शहर जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं। इसके अलावा टीवी धारावाहिक रहने वाली महलों की, लेफ्ट राइट, विष्णु पुराण, महाभारत में भी काम कर चुके हैं। महाभारत में वह द्रोणाचार्य बने थे। जिससे उन्हें बड़ी प्रसिद्धि मिली। उन्होंने गुरु शुक्राचार्य में राक्षसों के गुरु, रामसे ब्रदर्स के हारर सीरीयल साया और शक्तिमान में किलविश की भूमिका से भी प्रसिद्धि मिली। उन्होंने वेब सिरीज़ में भी काम किया है और कर रहे हैं। उनका पिछले वर्ष जारी धारावाहिक मेरी डोली मेरे अंगना है। उन्होंने भोजपुरी फिल्मों के निर्माण और निर्देशन में भी काम किया है तथा राजस्थानी फिल्मों में अभिनय किया है। उनकी फिल्म सफाईबाज द स्कार्वेजर्स गत वर्ष रिलीज हुई थी।
दिग्गज पत्रकार कुलदीप तलवार के छोटे भाई हैं :
अपनी लेखनी से हिंदुस्तान और पाकिस्तान में तहलका मचाने वाले तथा गदर -एक प्रेम कथा, वीर, द हीरो, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों, घायल: वंस अगेन जैसी फिल्मों के लेखक शक्तिमान तलवार गाजियाबाद निवासी दिग्गज पत्रकार कुलदीप तलवार के छोटे भाई है। उन्होंने शुरूआत में दूरदर्शन के हास्य सीरियलों में बहुत काम किया। मुंबई अभिनेता बनने गए थे लेकिन बन गए फिल्म लेखक। सनी देओल की गदर 2 की घोषणा हो चुकी है। आजकल उसी में जुटे हुए हैं।
फिल्म है तुझे सलाम इंडिया में नजर आएंगे :
गाजियाबाद के मालीवाड़ा निवासी उद्यमी उमा कांत दीक्षित के छोटे भाई रंगकर्मी और अब चर्चित अभिनेताओं में शुमार निशीकांत दीक्षित एड फिल्म, क्राइम पेट्रोल, धारावाहिकों और फिल्मों का ऐसा चेहरा है जो फिल्म नगरी के सभी दिग्गज अभिनेता और अभिनेत्रियां के साथ सह कलाकार के रूप में काम कर चुके हैं और कर रहे हैं। स्टार प्लस के सीरियल मायके से बंधी डोर (राजाराम) और सब टीवी धारावाहिक चिंटू चिंकी और एक बड़ी सी लव स्टोरी (कमलाकर त्रिपाठी) से उन्होंने शुरूआत की थी। दिल से दी दुआ -सौभाग्यवती भव (राजीव कुमार अवस्थी), उड़ान (प्रिंसिपल), पिया रंगरेज (मुकंद मिश्रा), इश्क के रंग सफेद (शंभू त्रिपाठी), जाट की जुगनी, इश्क सुभानल्लाह (खालिद मियां) व पवित्र रिश्ता (चड्डा) चर्चित धारावाहिक रहे। वर्ष 2004 से शुरू हुआ उनका फिल्मी कैरियर दीवार (कैप्टन अजित वर्मा), आन (सब इंस्पेक्टर शिंदे), रघु रोमियो (एस्ट्रोलॉजर), प्यार में ट्विस्ट (हवलदार), जय संतोषी मां (ड्राइवर), बिग ब्रदर (इंस्पेक्टर), अपने (सुखी लाल), लागा चुनरी में दाग़ (डी के चौपड़ा), गो (हवलदार), जब वी मेट (टिकट कलेक्टर), सुपर स्टार (रिपोर्टर), एक -द पावर आफ वन (कुलकर्णी सीबीआई आफिसर), वाण्टेड (रिपोर्टर), वीर (मान सिंह), खेलें हम जी जान से (देबोजीत), खिचड़ी -द मूवी (डॉक्टर), भूत और फ्रेड (शर्मा जी), लफंगे परिंदे (मिनिस्टर), हलो डार्लिंग (रघु माली), भेजा फ्राई 2 (दूबे पंडित), मैक्सीमम (एडवोकेट सूरी), कागज के फूल (इंस्पेक्टर), परमानु (आफीसर इन पीएम आफिस), बंटी और बबली 2 (पिंटू) और इस वर्ष रिलीज फिल्म है तुझे सलाम इंडिया में वह नारंग के रोल में नजर आएंगे।
पिछले 40 साल से रंगमंच में सक्रिय हैं अक्षयवरनाथ :
गाजियाबाद के रंगकर्मियों की बात हो और 3-4 दशक से सक्रिय और आज भी रंगमंच को ऊंचाई प्रदान करने वाले गाजियाबाद के अक्षयवरनाथ श्रीवास्तव और संदीप सिंहवाल की बात न हो तो सही नहीं कहा जायेगा। अक्षयवरनाथ श्रीवास्तव पिछले 40 साल से रंगमंच में सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में उदघोषक के रूप में शुरुआत की। राष्ट्रीय स्तर के नाट्य समारोहों में अपने नाटकों का प्रदर्शन किया। अभिनय और नाटकों के प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने विभिन्न संस्थानों में विभिन्न आयु वर्ग में अभिनय प्रशिक्षण देने के क्षेत्र में भी सराहनीय कार्य किया है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के सहयोग से उन्होंने वर्ष 1999 से 2010 तक गाजियाबाद में बाल रंगमंच कार्यशालाओं का भी उल्लेखनीय आयोजन किया। जिससे इस क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना हुई और उन्हें पुरस्कृत भी किया गया। आल इंडिया रेडियो पर भी उन्होंने बतौर उदघोषक कई आयोजनों की मेजबानी की। वर्तमान में आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर क्रांतिकारी वीरांगना दुर्गा भाभी पर लिखे उनके नाटक के प्रदर्शन देश भर में जारी हैं।
उनकी कार्यशाला से सीख अभिनय :
गाजियाबाद के रंगकर्मी संदीप सिंहवाल पिछले 30 वर्षो से रंगमंच से जुड़े हुए हैं। उन्होंने तीन फिल्मों में काम किया है। बरसात, साजन चले ससुराल और कर्ण-2, उन्होंने सीरियल चाणक्य शिला-2 दूरदर्शन सीरियल 200 नाटक किए हैं तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल में एक वर्ष तक काम किया है। उनकी कार्यशाला से अभिनय सीखकर प्रदीप नागर ने भोकाल वेब सिरीज़ में मेन रोल किया है तथा फिल्म हाइवे में भी काम किया है। एक अन्य प्रदीप सिंह ने भी उनसे प्रशिक्षण लिया था। उसने अपनी लिखी फिल्म नवाबजादा में अभिनय भी किया है। उनके साथी रंगकर्मी विपिन कसाना ने भी पवित्र रिश्ता सीरियल में काम किया है।
(लेखक गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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