कायस्थों की अनदेखी भाजपा के लिए ठीक नहीं

जितेन्द्र बच्चन
भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार का नारा है- ‘सबका साथ सबका विकास!’ लेकिन कायस्थ समाज की अक्सर उपेक्षा होती रही है। भाजपा अगड़ी-पिछड़ी जतियों को साधने के लिए राजनीतिक संदेश दे रही है- ‘आप भाजपा से जुडि़ए, इसी में आपका भविष्य है।’ लेकिन कायस्थ संगठनों की मांग दरकिनार कर दी जाती है। ऐसे में मिशन-2024 की जीत को लेकर जहां भाजपा नई-नई रणनीति बना रही है, वहीं कायस्थ समाज अब अपनी आवाज बुलंद करने लगा है। भाजपा को पता है कि अगर 2024 का लोकसभा चुनाव जीतना है तो उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा क्षेत्रों में जाति संतुलन बनाना जरूरी है। शायद उसी दांव पेंच के तहत पिछले दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के सैनी समाज से धर्मपाल सिंह को उत्तर प्रदेश में पार्टी संगठन का महामंत्री बना दिया। इसके बाद प्रदेश सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौपकर जाट समुदाय में एक संदेश दिया कि हम उनके साथ हैं। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य सहित दलित वर्ग को सरकार व संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर बैठा दिया गया, लेकिन कायस्थ समाज की लगातार अनदेखी होती रही।
कायस्थों का हक बनता है:
उत्तर प्रदेश में कायस्थों की संख्या दो करोड़ से अधिक है। इसके बावजूद भाजपा सरकार और संगठन के ‘सबका साथ सबका विकास’ से दूर है। यह समाज सबसे अधिक प्रतिशत में भाजपा को समर्थन मत देने वाला समाज है, फिर भी उपेक्षित है। इसकी आवाज अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उठने लगी है। कायस्थ समाज 2023 में होने वाले बरेली मुरादाबाद स्नातक खंड विधान परिषद क्षेत्र से चुनाव में अपना प्रत्याशी मांग रहा है। इसके तहत कुल नौ जिले बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, संभल, बिजनौर आते हैं, 53 विधानसभा और 12 लोकसभा क्षेत्र में कायस्थ समाज के शिक्षित लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी है। करीब 10 लाख स्नातक कायस्थ मतदाता हैं। ऐसे में कायस्थों का मानना है कि जब प्रत्येक जाति अपनी राजनीतिक भागीदारी मांग रही है तो उसकी आवाज क्यों दबाई जा रही है? उसकी उपेक्षा क्यों, जबकि बरेली मुरादाबाद स्नातक खंड विधान परिषद क्षेत्र में उसका हक बनता है।
कायस्थ संगठनों ने भरी हुंकार:
ज्ञात रहे कि दो बार से इस क्षेत्र से जयपाल सिंह व्यस्त प्रत्याशी रहे हैं। उनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक हो चुकी है। भाजपा की घोषणा है कि युवाओं को आगे लाना है। ऐसे में कायस्थ समाज और उसके विभिन्न संगठनों को एक मजबूत आधार मिल गया है। उनका कहना है कि कायस्थ समाज के तेज तर्रार युवा नेता मनोज सक्सेना दो दशक से कायस्थों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उनका बरेली मुरादाबाद स्नातक खंड विधान परिषद क्षेत्र में अच्छा जनाधार है। उन्हें ही भाजपा का प्रत्याशी बनाया जाए। रविवार, 11 सितम्बर को भी कायस्थों के कई संगठनों ने बरेली में संवाददाता सम्मेलन कर एक साझा बयान के तहत मनोज सक्सेना को इस क्षेत्र से प्रत्याशी बनाने की मांग की। बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, संभल और बिजनौर आदि जिले के कायस्थ मनोज सक्सेना के लिए लगातार हुंकार भर रहे हैं।
… तो बदल सकते हैं समीकरण:
दलगत राजनीति से उठकर भी मनोज सक्सेना को समर्थन मिल रहा है और कायस्थ समाज भी भाजपा के साथ खड़ा है लेकिन उसकी सुनवाई नहीं की गई तो विरोधी स्वर मुखर होने में देर नहीं लगेगी। कायस्थों का मानना है कि उनका समाज इस स्नातक क्षेत्र में भाजपा के लिए सबसे मजबूत वोट बैंक है। अगर भारतीय जनता पार्टी ने मनोज सक्सेना को प्रत्याशी नहीं बनाया और यह सोचने की भूल की कि वह जाएंगे कहां तो कायस्थ समाज भाजपा से किनारा कर सकता है। इस स्थिति में कायस्थों की अनदेखी करना सरकार व संगठन दोनों के लिए जोखिम साबित होगा। दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 9 जिलों, 53 विधानसभा और 11 लोकसभा क्षेत्रों में कायस्थ समाज के करीब 10 लाख वोट हैं। इस नजरिए से मिशन-2024 (लोक सभा चुनाव) पर विजय हासिल करने के लिए कायस्थ समाज भाजपा के लिए अति महत्वपूर्ण है। उसे यह भी समझना होगा कि अगर कायस्थ समाज की अनदेखी की गई और उसने बरेली मुरादाबाद खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपना प्रत्याशी उतार दिया तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
(लेखक पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष व स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*