राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। सर्व भाषा ट्रस्ट एवं केदारनाथ मिश्र प्रभात फ़ाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ऑनलाइन साहित्यकार व कवि केदारनाथ मिश्र ‘प्रभात’ की 115वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर उनके प्रभात -समग्र (खंड-4) का भव्य लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में कई प्रांतों के हिंदी के प्रखर हस्ताक्षर आमंत्रित थे। इनमें पद्मश्री उषाकिरण खान, सर्व भाषा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ अशोक लव, डॉ. मधु चतुर्वेदी, डॉ.सुमेधा पाठक, डॉ वंदना वाजपेयी और आचार्य उमाशंकर सिंह प्रमुख रहे।
कार्यक्रम का संचालन सर्व भाषा ट्रस्ट के समन्वयक-लेखक केशव मोहन पांडेय ने किया। साहित्य के चमकते नक्षत्रों के कर कमलों द्वारा लोकार्पित समग्र 4 सूर्य की तरह मंच पर रोशनी बिखेर रहा था। आचार्य उमाशंकर सिंह ने कहा कि महाकवि की तीन रचनाएं ज्वाला, कालदहन और कैकेयी ऐसी कृतियां हैं जो उन्हें राष्ट्रकवि घोषित करनेवाली हैं। कैकेयी को राष्ट्रमाता कहनेवाला कवि राष्ट्रकवि ही हो सकता है।
पद्मश्री उषाकिरण खान ने महाकवि की जयंती को स्मरण करते हुए उन्हें शब्दांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उनकी कविताएं ओजपूर्ण होती थीं जो उनके पाठ करते ही मंच पर समां बांध देती थीं। डॉ अशोक लव ने कहा कि एक युग था जब साहित्य एक मिशन का रूप था, आज साहित्य व्यवसाय के रूप में छटपटा रहा है। ज्वाला की कविताओं जैसी जाग्रत झंकृत करने वाली कविताएं खोजनी पड़ती हैं। वरिष्ठ कवयित्री डॉ मधु चतुर्वेदी ने महाकवि प्रभात को शब्दांजलि अर्पित की। आचार्य उमाशंकर सिंह ने भी अपना वक्तव्य रखा। अंत में फाउंडेशन की अध्यक्ष रागिनी भारद्वाज ने श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।


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