राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
सुलतानपुर। जनपद के जयसिंहपुर क्षेत्र के पलिया गांव के एक तथाकथित नेता ने पार्टी का रुतबा दिखाते हुए प्रशासन के साथ मिलकर अपने ही चचेरे भाइयों के घर के बीच से व्यग्तिगत रास्ता के लिए 20 वर्ष पुराने नीम के एक पेड़ पर आरी चलवा दी और उसके चबूतरे पर स्थापित महादेव का मंदिर ढहा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि यह सबकुछ एसडीएम जयसिंहपुर और थाना गोसाईगंज पुलिस की मौजूदगी में हुआ। घटना का विरोध करने पर पीड़ित के साथ दुर्व्यवहार किया गया और पीड़ित एडवोकेट हिमांशु के बुजुर्ग पिता को घंटों थाने में बिठाए रखा गया।
एडवोकेट हिमांशु श्रीवास्तव दिल्ली स्थित भारतीय लीगल फर्म के फाउंडर हैं। उन्होंने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को बताया कि एसडीएम जयसिंहपुर राजनीतिक दबाव में हैं। उन्होंने बिना किसी सूचना या नोटिस के गैरकानूनी तरीके से पक्के घर के कॉर्नर की नीव और महादेव के मंदिर को तोड़वा दिया। एसडीएम जयसिंहपुर इतना दबाव में थे कि उन्हें यह भी ध्यान नहीं रहा कि नीम के हरे पेड़ को बिना किसी अनुमति के काटना अपराध है और आरी चलवा दी गई।
इस मामले में पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव सुधांशु श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी राघवेन्द्र श्रीवास्तव का इरादा उनके परिवार को एक साजिश के तहत मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से परेशान करना है। राघवेन्द्र ने चौड़ी व्यक्तिगत रास्ते को आधार बनाकर स्थानीय नेताओं को गलत जानकारी दी और शासन-प्रशासन पर गैरकानूनी कार्यवाही करने का लगातार दबाव बना रहे है। सुधांशु श्रीवास्तव ने बताया कि करीब 20 वर्ष पूर्व इस घर का निर्माण उनके पूर्वजों ने कराया है। साथ ही नीम का एक पेड़ विधिवत लगाकर उसके चबूतरे पर एक मंदिर स्थापित किया था। हरा नीम का पेड़ काटने का प्रयास करना और मंदिर उखाड़ फेंकना किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता।
पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं दूसरे पक्ष राघवेन्द्र श्रीवास्तव ने इस मामले में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उनका मानना है कि वह अपने घर तक रास्ता लेकर रहेंगे। इसके लिए उन्हें चाहे कुछ भी करना पड़े। अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन कानून के दायरे में पीड़ित को न्याय देता है या नहीं?


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