राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
मुजफ्फरपुर। अखिल भारतीय बज्जिका विकास संघ बिहार के राष्ट्रीय अध्यक्ष उमेश राय ने बिहार सरकार के उस निर्णय को हास्यास्पद बताया है, जिसके द्वारा सरकार ने इंजीनियरिंग एवं मेडिकल सहित कानून की पढ़ाई आदि तकनीकी क्षेत्रों में पठन-पाठन हेतु मैथिली भाषा में पुस्तक लेखन एवं अनुवाद करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि मैथिली एक जाति विशेष की भाषा है और इसे दरभंगा, मधुबनी जिला के तीन से पाँच प्रतिशत लोग ही अपनी बोलचाल के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
उन्होंने प्रतियोगिता के इस दौर में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को मैथिली जैसी क्षेत्रीय भाषा में पठन-पाठन की योजना को आम आदमी के लिए घातक बताया है और उन्हें प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त करने से वंचित करने की एक साजिश करार दिया। उन्होंने कहाक मैथिली भाषा की संकीर्णता को देखते हुए ही बिहार सरकार ने उसे प्रतिबंधित कर रखा है। मैथिली एक जातीय भाषा है।
श्री राय ने कहा कि दरभंगा एवं मधुबनी जिला के गैर मैथिल ब्राह्मण जाति के एक भी उम्मीदवार का चयन नहीं होता है। यही कारण है कि बिहार सरकार ने बार-बार मैथिली भाषा को बिहार लोक सेवा आयोग से प्रतिबंधित कर रखा है। उन्होंने बिहार सरकार से इस विवेकहीन निर्णय को अविलंब वापस लेने की माँग की है।


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