राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। संविधान दिवस के अवसर पर वसुंधरा स्थित मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के विवेकानंद सभागार में आयोजित को संबोधित करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार ने विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम कर श्रेष्ठ वकील बनने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि हम महिलाओं के अधिकारों की बात तो करते हैं लेकिन यह भूल जाते हैं कि हमारे घर में पिता, पति और बेटा भी रहते हैं। उनके अधिकारों की बात कौन करेगा। हमें समाज में बराबरी के हक पर चर्चा करनी चाहिये। उनके मूलभूत अधिकारों और दायित्वों के प्रति गंभीरता बरतनी चाहिए।
उन्होंने आर्टिकल 19, 21, 32, 226, 136 और 227 के कानूनी प्रावधानों के अलावा केश्वानंद भारती केस की जानकारी भी विद्यार्थियों को दी। इससे पहले विद्यार्थियों ने वसुंधरा क्षेत्र में संविधान जागरूकता रैली निकाली। गरीबों की मदद के लिए गेट नंबर दो के पास कानूनी सहायता शिविर लगाया। इस मौके पर इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस बच्चों को करोड़पति व अरबपति बनने के लिए वकील नहीं बना रहा, बल्कि बच्चे वकील बनकर गरीब तबके के लोगों को न्याय दिलाएं, मेवाड़ का यही एक मिशन और विजन है।
उन्होंने कहा कि देश में आज भी लोगों को सुरक्षा व न्याय देना सबसे बड़ी चुनौती है। अदालतों में लाखों रुपये देकर न्याय हासिल किये जा रहे हैं, ऐसे में किसी गरीब को कैसे न्याय मिल सकता है। उसके पास तो वकील की फीस देने तक को पैसे नहीं होते। देश की अदालतों में आज दो करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित पड़े हैं। लोगों को न्याय मिलने की आस टूट रही है। जजों पर मुकदमों को सुनने व उनपर फैसला करने का लोड दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है।
बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अलका अग्रवाल ने बताया कि इंस्टीट्यूशंस के विद्यार्थी समय-समय पर मुफ्त कानूनी सहायता शिविर का आयोजन करते हैं, जिसके तहत गरीब तबके के लोगों को न्याय दिलाने की मुहिम चलायी जा रही है। चेयरमैन डॉ. गदिया एवं निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न व शॉल भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट का शिक्षण स्टाफ व विद्यार्थी मौजूद थे।


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